पिन्टू सिंह 

(बलिया ) भीमा कोरेगांव के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के द्वारा कई प्रमुख बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर गंभीर किस्म के आरोप लगाए गए और वह एक लंबे अरसे से जेलों में बंद है l केंद्र सरकार एनएसए ने ऐसे तमाम प्रश्न खड़े किए गए हैं जिनका उत्तर आसानी से मुश्किल है l जन आंदोलनों में शालीनता के साथ साथ कभी-कभी गर्मी भी आ जाती है l उक्त विचार व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार “अनजान” ने फादर स्टेन स्वामी केअस्पताल में मृत्यु पर अदालती कामकाज पर सख्त टिप्पणी की l जन आंदोलनों में शामिल लोगों की राजनीतिक और सामाजिक जिंदगी को गंभीरता से देखा जाना चाहिए l अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में 124 लोगों पर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत तर्क हीन आरोप लगाए गए l 118 लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आधारहीन तर्को को ध्यान में रखते हुए उन पर लगे धाराओं को समाप्त कर दिया l समाज के वंचितों में काम किए जाने के लिए एक मशहूर व्यक्तित्व के रूप में चर्चित फादर स्टेन स्वामी लगभग 6 दशक से इस काम को कर रहे थे l 84 वर्षीय स्टेन स्वामी को मुंबई में गिरफ्तार कर जेल में डाला गया l जहां वह गंभीर और पार्किंसन जैसे रोग से ग्रसित थे और बिना किसी सहारे के उठ बैठ नहीं सकते थे l यहां तक कि हाथ में पानी का गिलास लेकर के भी पानी पी नहीं पी सकते थे l कई बार उन्हें जमानत दिए जाने के लिए अदालत से प्रार्थना की l उनकी जमानत हमेशा निरस्त की जाती रही और उनके देहांत के कुछ हफ्ते पहले उन्हें अस्पताल में इलाज करने के लिए मुंबई हाई कोर्ट ने अनुमति दी l अस्पताल में भी उन्हें पैरों में जंजीर से बांधकर रखा गया l देश के अदालती आदेशों को और पुलिस के द्वारा सामाजिक राजनीतिक व्यक्तित्व के प्रति अपनाए गए कठोर अनावश्यक अवधारणा को गंभीरता से न लिए जाने की आवश्यकता को हमारी न्यायपालिका कब गहराई से समझेगी यह अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल न्यायपालिका को समझने की जरूरत है l भारतीय न्यायिक व्यवस्था को सोचना चाहिए था की फादर स्टैंन स्वामी
जैसा 84 वर्ष का मरीज जो चलने में असमर्थ है कैसे भाग सकता है l उसे क्यों अस्पताल में बेडियो से बांधा गया l उसे जमानत दे दी जाती तो क्या भारतीय न्यायिक व्यवस्था गहरे संकट में डूब जाती l फादर स्टेन स्वामी की मौत ने कई अनसुलझे, अतार्किक, न्यायिक दृष्टिकोण को चुनौती दे दी है l इसे सुप्रीम कोर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए l