राजेश सिंह
अतरौलिया में वैज्ञानिकों द्वारा ग्रामीण समुदाय के दुर्बल वर्ग हेतु सतत कृषि हेतु कृषि अवशेषों का सूक्ष्मजीव आधारित जैव उत्परिवर्तन तकनीक का एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनी का कार्यक्रम का किया गया । मऊ जनपद के कुशमौर स्थित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित एस.सी.एस.पी परियोजना के अंतर्गतकार्यक्रम में ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान ऐन जी ओ के सचिव  राजदेव चतुर्वेदी, ग्राम प्रधान रामधारी व अन्य ग्रामीणों ने वैज्ञानिकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ रेनू एवं डॉ पवन कुमार शर्मा, कृषि विज्ञानं केंद्र, कोटवा के वैज्ञानिक डॉ आर के सिंह, डॉ रूद्र प्रताप सिंह, डॉ रणधीर नायक और श्री शैलेंद्र सिंह ने किसानों के साथ स्वस्थ पर्यावरण, फसल, मिटटी हेतु उचित कृषि तकनीकों को अपनाने पर विचार विमर्श किया।. ब्यूरो की प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रभारी डॉ. रेनू ने किसानों को कृषि अवशेषों की त्वरित कम्पोस्टिंग प्रक्रिया एवं कृषि में जैविक एवं उन्नत तौर-तरीकों को अपनाने के लिए जोर दिया। डॉ. रेनू ने बताया कि वर्तमान में रासायनिक-फसल उत्पादन पद्धतियों से छुटकारा दिलाने में भूमिका निभाने वाले नए विकल्पों  के रूप में किसानों के सामने सूक्ष्मजीवों के जैविक अनुकल्पों के रूप में ट्राईकोडर्मा, स्यूडोमोनास, पी एस बी, बैसीलस, बीवेरिया, एजोटोबैक्टर, राइजोबियम, माइकोराइजा आदि उपलब्ध हैं।. इन विकल्पों को खेती में स्थान देने से मिट्टी और फसल दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सकता है। डॉ आर के सिंह  हेड कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा ने बताया कि कृषि रसायनों से उपजी समस्याओं के समूल निराकरण के लिए सूक्ष्मजीव, गुणवत्तायुक्त कम्पोस्ट और पौध-आधारित प्राकृतिक तत्व अनुकल्पों के रूप में किसानों के द्वारा अपनाए जाएँ, यह समय की मांग है। डॉ रूद्र प्रताप सिंह में बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनपद के किसानों को धीरे धीरे ही सही पर रसायन-आधारित कृषि पद्धतियों से छुटकारा दिलाना है। डॉ पवन कुमार शर्मा ने महिला किसानों के सामने सूक्ष्मजीव द्वारा बीज, जड़ और मृदा शोधन के प्रयोगों को प्रदर्शित करने के साथ ही खेत में फसलों पर इन जीवों के जलीय अनुकल्पों का छिड़काव भी करके दिखाया। डॉ रणधीर नायक बताया कि त्वरित कम्पोस्टिंग की एक ऐसी टेक्नोलोजी जो लगभग 60-70 दिनों के भीतर कृषि अवशेषों को कम्पोस्ट में परिवर्तित कर सकती है । प्रशिक्षण कार्यक्रम में गाँव के110 से अधिक महिला किसानों ने भाग लिया। इन महिला किसानों में हाल ही में एक फार्मर प्रोड्यूसर ग्रुप बनाया है। पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में परियोजना से जुड़े शोधकर्ता आशीष, नागेश, अमित, आस्था तिवारी, रविंदर हरिओम आदि की विशेष भूमिका रही।