अब्दुर्रहमान शेख
आजमगढ। मदरसा इस्लामिया बैरीदिह के छात्र मोहम्मद अब्दुल्लाह ने मात्र 14 माह में कुरआन मजीद को कंठस्थ कर लिया, इस अवसर पर मौलाना साबिर कासमी ने कहा कि अल्लाह ने इरशाद फ़रमाया कि कुरआन को हम ने नाजिल किया है, और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम खुद लेते हैं। क्यों कि कुरआन से पहले बहुत सी किताबें नाजिल हुईं, और समाप्त हो गईं । और कुरआन आखिरी आसमानी किताब है, अब इसके बाद कोई दूसरी किताब नहीं आएगी। वह लोग खुश किस्मत हैं जिनके सीनों में कुरआन मजीद मौजूद है, वह मां बाप भी भाग्य शाली है जिसके बच्चे हाफ़िज़ हों। क्यामत के दिन ऐसे दस लोगों की एक हाफ़िज़ की पैरवी पर अल्लाह जन्नत देगा जिनके लिए नरक का फ़ैसला हो गया था। इस अवसर पर शाह आलम, हाजी अख्तर, नसीम अहमद, मौलवी मोहम्मद सैफ़, मौलाना अनीस अहमद, कुतुबुद्दीन, हाफ़िज़ अब्दुल राजिक, मौलाना लाईक, जमालुद्दीन, हाफ़िज़ अबूज़र, मिर्ज़ा शहाबुद्दीन मौजूद थे। प्रोग्राम की शुरुआत हाफ़िज़ आदिल के कुरआन की तिलावत से और मौलाना शहाब की नात पाक से हुआ, संचालन मौलाना औरंगजेब ने किया, मौलाना अब्दुल कादिर की दुआ पर मजलिस का समापन हुआ।