बिकाश सिंह

बलिया जनपद के कद्दावर नेता अम्बिका चौधरी भी अपने बेटे आनंद चौधरी के साथ सपा में अपनी घर वापसी कर ली। इसी तरह मऊ के बाहुबली बिधायक मुख्तार अंसारी के भाई पूर्व बिधायक सिबगतुल्लाह अंसारी अपने पुत्र मुन्नू अंसारी साईकिल पर सवार हो गये, सिबगतुल्लाह और अम्बिका के सपा में आने से गाजीपुर और बलिया के सपा कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है।
उप्र विस चुनाव २०२२ के मद्देनजर सपा मुखिया अखिलेश सिंह यादव दल को मजबूत करने में लगे हैं। इसके तहत बड़े जनाधार वाले कद्दावर नेताओं की घर वापसी शुरू हो गई है। काफी इंतेजार के बाद प्रदेश में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले तथा पूर्वांचल के दिग्गज नेताओं में से एक अम्बिका चौधरी का सपा में आना पार्टी के लिए सुखद बताया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ दूसरे दरवाजे से अंसारी बंधुओं का सपा में इंट्री भी विधानसभा चुनाव में एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव को देखा जाए तो सपा में परिवारिक दरार व पार्टी में उथल, पुथल के बीच कई बड़े नेता किनारे लग गए थे। जिनमें अम्बिका चौधरी भी एक थे। पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज अम्बिका चौधरी ने तब बसपा का दामन थाम लिया था और चुनावी समर में कूद पड़े थे। लेकिन अंतत: उन्हें वर्ष २०१७ के चुनाव में हताशा व निराशा हाथ लगी थी, यहां से उपेंद्र तिवारी को जनता ने जिताकर विधानसभा भेजा था। यही हाल मोहम्मदाबाद विस क्षेत्र में देखने को मिला। वहां भी सिबगतुल्लाह अंसारी बसपा के झंडे और डंडे के नीचे चुनाव जरूर लड़ा और पूरी ताकत भी लगाई। लेकिन सफलता नहीं मिली। अंसारी बंधु का वर्चस्व विस चुनाव में बिखर गया और वहां से भाजपा की अलका राय को जीत मिली थी। अब २०२२ के विधानसभा चुनाव में सपा इन दोनों नेताओं को चुनाव में उतारने के लिए टिकट देती है या नहीं यह तो समय तय करेगा। लेकिन राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का बाजार एक बार फिर दिलचस्प हो गया है।