वरूण सिंह

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM चीफ ओवैसी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर की तस्वीरें एक

साथ सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के लिए खतरे की घंटी बज गई है,  इस तीनों तस्वीर ने यूपी के राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाले चुनाव से पहले तीनों दलों के नेताओं का एक साथ दिखना बड़ी पार्टियों के लिए बड़ा संकेत हैं, हालांकि इस मुलाकात को लेकर तीनों दलों में से कोई बोलने को तैयार नहीं है, यूूपी में 2022 में विधानसभा चुनाव होना है, उससे पहले यूपी में नए समीकरण और नए गठबंधन की अटकलें रोज लगाई जा रही हैं, ओवैसी, राजभर और चंद्रशेखर की मुलाकात कब और कहां हुई इसकी जानकारी सामने नहीं आयी है, लेकिन कुछ सूत्रों के मुुुताबिक यह तस्वीर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम की है, जहां तीनों नेता पहुंचे थे,

ओवैसी, ओम प्रकाश राजभर और चंद्रशेखर की जो तस्वीर सामने आयी है, उसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कार्यक्रमों में विरोधी नेताओं की मुलाकात होना स्वाभाविक बात है, लेकिन यदि तीनों की मुलाकात निजी है, तो आने वाले समय में यह यूपी में नया सियासी गुल खिला सकती है, विश्लेषकों का कहना है कि तीनों पार्टियां यदि भागीदारी मोर्चा के तले एकजुट हुईं, जैसा कि ओम प्रकाश राजभर दावा करते हैं, तो बड़ी पार्टियों को नुकसान हो सकता है, कारण की भीम आर्मी की पकड़ पश्चिमी यूपी में दलित समुदाय में ज्यादा है और उनकी अपनी फैन फालोइंग भी है, यदि उनकी पार्टी भागीदारी मोर्चा में शामिल हुई तो बसपा के वोटों में बिखराव हो सकता है, हालांकि सुभासपा से गठबंधन की अटकलों को लेकर एआईएमआईएम के यूपी चीफ शौकत अली ने कहा है, “जहां तक सुभासपा से यूपी में गठबंधन का सवाल है तो ओम प्रकाश राजभर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं, वो कह चुके हैं कि हमारी पार्टी एआईएमआईएम के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी, कोई साथ नहीं लड़ेगा तो हम अकेले ही लड़ेंगे।”