डाक्टर कि जगह फार्मासिस्ट बना डाक्टर बिटिया कि मौत

पिन्टू सिंह

(बलिया) उत्तर प्रदेश के बलिया जिला अस्पताल के बाद जनपद के सबसे महत्वपूर्ण अस्पताल रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की समस्याओ की बात करें तो वर्षों से एमडी,सर्जन विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी है।
बावजूद आज तक मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पाने के कारण उन्हें मऊ, वाराणसी आदि शहरों को जाने को बाध्य होना पड़ता है।
इस सीएचसी पर प्रतिदिन हजारों मरीजों की तादात के परिप्रेक्षय में सुविधाएं नामात्र ही साबित होती हैं। 30 बेड वाले इस सीएचसी में दुर्घटनाओ में घायल लोगों व अन्य रोगों से पीड़ित गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिए जाते हैं।
इस सीएसची की नासूर हो चुकी समस्याओ के समाधान के लिए
बार-बार दैनिक भास्कर न्यूज डाटकाम मुख्यचिकित्साधिकारी व अधीक्षक वीरेन्द्र कुमार जी को बार बार ध्यान आकृष्ट कराया गया मगर आज तक केवल आश्वासन दिया गया कि बदलाव दिखेगा किंतु अभी तक इसका असर धरातल पर देखने को नहीं मिला।
एक तरफ प्रदेश सरकार लगातार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर करने में जुटी हुई है।
भरें मंच से इस बात का ऐलान भी खूब करती नजर आती हैं।
वहीं प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का दावा करने वाली योगी सरकार भष्ट्राचार की भेट चढती जा रही हैं।
एक तरफ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सरायभारती पर दिन दहाड़े मरीजों से फर्मासिस्ट गंगा सागर यादव पैसा ले रहा है ।मुख्यचिकित्साधिकारी ने कहा जाचं गठित किया हू मगर हुजूर 6 दिन बीतने के बाद भी रिपोर्ट उजागर नहीं हुआ।
खैर बताते चलें कि ताजा मामला बुधवार है एक तरफ देश के प्रधानमंत्री पढों बेटियों, बढो बेटियों का नारा दे रहे हैं।
दुसरी तरफ प्रदेश के यशश्वी मुख्यमंत्री जी पढाई ,लिखाई, दवाई ,पर पानी की तरह पैसा बहा रही ताकि मीशन 2022 नजदीक है।
मगर बुधवार को सब धरा का धरा रह गया।बुधवार की शाम 5 बजे बिटिया के पेट में अचानक दर्द होने पर प्राईवेट गाडी कर परिजन तत्काल रसड़ा सीएचसी पहुंचे जहाँ डाक्टर के नहीं रहने पर फार्मासिस्ट पंकज ही डाक्टर बनकर बिटिया को मृत घोषित कर दिया हालांकि कुछ देर बाद डाक्टर आये और पुनः चेक किया फिर मृत घोषित किया।
मौत की खबर सुन माता पिता दहाड़े मारकर रोते हुए अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाकर रोते हुए घर लेकर चले गए।
मृतक ज्योति उम्र 18 पिता रामप्रवेश निवासी उडियान पुर थान कोतवाली रसड़ा ।
👉 इस पूरे मामले पर मुख्यचिकित्साधिकारी से बातचीत करना चाहा मगर हुजूर फोन उठाने की जहमत नहीं उठाए।
👉 फिर इस पूरे मामले पर अधीक्षक वीरेन्द्र कुमार जी को ध्यान आकृष्ट कराया मगर उन्होंने सन्तुष्ट जनक जबाब नहीं दिया।