पिन्टू सिंह

(बलिया) पूर्वांचल के पूर्वी छोर पर बलिया जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर लखनऊ राजधानी मार्ग पर रसड़ा तहसील क्षेत्र के पहाड़पुर गांव के दक्षिण में पूर्व अवस्थित उचेड़ा गांव में माँ चण्डी भवानी के मंदिर पर शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन गुरुवार को हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखा गया। 

*👉मंहत अजय गीरी* ने दैनिक भास्कर न्यूज संवाददाता से बातचीत में बतलाया कि शारदीय नवरात्र में यहां माता रानी को खप्पर, प्रसाद, नारियल, चुनरी आदि चढ़ाकर पूजा आराधना करने से मां भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
बताते चलें कि विंध्याचल की माँ विंध्यवासिनी की प्रतिमूर्ति के रूप में विख्यात इस मंदिर में माँ के सिरमुखी स्वरूप का यहां भक्तों को दर्शन होता है।
जो चौबीस घण्टे में तीन रूप धारण माँ करती है।
👉सुबह में बाल्यावस्था,
👉दोपहर में युवावस्था व
👉रात्रि में वृद्धावस्था के रूप में दर्शन देने वाली माँ चण्डी शारदीय व चैत्र नवरात्र के अलावा भी सच्चे मन से दरबार में आने वाले भक्तों की मनोवांछित मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
माँ चण्डी के स्वमेव उचेड़ा गांव में अवतरित होने की कथा भी काफी कौतूहल पूर्ण है।
कालान्तर में लगभग 225 वर्ष पूर्व गोपालपुर गांव के एक ब्राम्हण गोपाल चौबे प्रतिदिन मिर्जापुर विंध्याचल स्थित माँ विंध्यवासिनी का दर्शन करने के लिये उस जमाने में पैदल ही जाया करते थे।
समय बीतता गया और चौबे जी वृद्धावस्था में जब वे चलने फिरने में असमर्थ हो गये थे तो उन्होंने आखिरी बार माँ के दरबार में माँ से गुहार लगाते हुए कहा माँ अब मै आपके पास नहीं आ पाऊंगा। इसलिये अब आपको मेरे साथ ही चलना होगा।
भक्त की अपील सुन माँ विंध्यवासिनी ने भक्त को अपेक्षित आश्वासन दिया। वहां से लौटने के बाद उक्त ब्राम्हण रोज की तरह अपने घर में सो रहे थे, कि एक दिन स्वपन में माँ ने मंदिर के स्थान पर स्वमेव अवतरित होने की बात बतायी स्वपन देखते ही ब्राम्हण चौबे जी की नींद टुट गयी और सुबह होते उचेडा गांव की तरफ निकल पड़े उन दिनों में काफी जगल कि तरह था काफी खुदाई के बाद माँ का सिरमुखी दिखाई पडा फिर उन दिनों में डेहरी लगाकर मन्दिर का निर्माण कराया गया था।
इस मन्दिर का इतिहास रामचन्द्र चौबे व गोपाल चौबे का लम्बा इतिहास रहा है।
👉दैनिक भास्कर न्यूज डाटकाम कि अपील गुलाबी बरसात के कारण मंन्दिर पर जाने वाले रास्तों पर पानी भरा है।
भक्तों के लिए दो पहिया या चार पहिया वाहनों से जाने के लिए चिलकहर से मटिही वाले रास्ते पर प्रधानमंत्री सड़क पकड़ कर जा सकते माँ के दराबर मे या संवरा चट्टी से पहले नहर वाले रास्ते से जा सकते हैं।
बाकी पहाड़पुर व खलिलपुर दोनों रास्ते पानी से भरा हुआ है।
बाकी आपकी मर्जी