रिटायरमेंट के 5 वर्ष बादभी फर्मासिस्ट का मरीजों पर कब्जा

👉पिन्टू सिंह

(बलिया) उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में सात अक्टूबर 1989 वर्ष यानी तीन दशक पूर्व रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की नींव रखी गई तो इलाके के लोगों को यहां से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद जगी किंतु 32 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह अस्पताल अपनी बदहाली व दुर्व्यवस्था पर बेबसी का आंसु बहा रहा है।
किंतु वर्तमान में हालत यह है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के साथ-साथ डिजिटल युग में आधुनिक संसाधनों, अल्ट्रासाउंड मशीन का अभाव के साथ-साथ एक्सरे मशीन, जनेटर, आरो प्लांट काफी दिनों से खराब पड़े हैं। कुछ कमरों में पंखे खराब पड़े हैं या गायब कर दिए गए हैं। 30 बेड वाले इस महत्वपूर्ण सीएचसी पर लाखों की आबादी वाले रसड़ा नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों का इलाज भगवान भरोसा ही चल रहा है।
यहां पर समुचित इलाज के अभाव में अधिकांश मरीजों को रेफर कर दिया जाता है जिसकी कीमत अधिकांश मरीजों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।पिछले दिनों गुलाबी बारिश में सीएचसी परिसर में जलभराव की स्थिति कायम रही जिसके कारण उपचार भी बाधित हो जाता है।
सबसे बडी विडंबना देखिए सरकार फार्मासिस्ट को आवास के लिए लगभग 2000 रुपये वेतन से कटता है प्राईवेट मे रहने पर सरकार 2000 देती है।
मगर रिटायरमेंट के बाद भी पांच वर्षों से सरकारी भवनों में फर्मासिस्ट जमें है और सरकार का लगभग लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं साथही मरीजों का शोषण भी जमकर कर रहें हैं हास्पिटल काम्प्लेक्स मे रहकर ।
हालांकि इस पूरे प्रकरण पर
डा. वीरेंद्र कुमार, अधीक्षक सीएचसी रसड़ा का पक्ष जानकारी करने के लिए फोन मिलाया मगर फोन उठाने का जहमत नहीं उठाये।
फिर मुख्यचिकित्साधिकारी को बार बार फोन कर ध्यान आकृष्ट कराना चाहा और हुजूर से पूछना चाहता था कि रिटायरमेंट के बाद भी फार्मासिस्ट डाक्टर बनकर मरीजों का शोषण कर सकते हैं।
दूसरे तरफ जो वर्षों पहले यहा से डाक्टर स्थातरण हो गये है बार बार ध्यान आकृष्ट कराने के बाद दिवालों पर सिटीजन चार्ट का शोभा बढा रहे हैं।

👉स्वीकृत पद और तैनाती
चिकित्सक : सात पद, सात की तैनाती
👉फार्मासिस्ट : चार पद, चार की तैनातीं
👉स्टाप नर्स : नौ पद, पांच स्थायी और चार संविदा
एलटी संविदा तीन पद, तीन की तैनाती
👉वार्ड व्याय तीन पद, तीन की तैनाती
👉स्वीपर : एक पद, एक की तैनाती
👉एक्सरे सहायक : एक पद, एक की तैनाती