अबुल फैज
आज़मगढ़ । जुलूस ए अमारी उर्दू कलेंडर के 8 रबीउलअव्वल को मनाया जाता है, बतादें कि रसूल से नवासे हज़रत इमाम हुसैन सहित 72 लोगों की शहादत की याद में शिया समुदाय के लोगों ने शुक्रवार की सुबह नमाज के बाद जुलूस-ए-अमारी का जुलूस निकाला , जुलूस में स्थानीय एवं बाहरी अंजुमनों ने भी शिरकत कर नौहाख्वानी और सीनाजनी कर माहौल को गमगीन कर दिया, जुलूस इमामबाड़ा बारगाहे हुसैनी पुराबाग से शुरू होकर कदीमी रास्तों से होता हुआ मदरसा बाबुल इल्म पर पहुंच कर समाप्त हुआ। इस अवसर पर में मौलाना गमखार हुसैन बिजनौरी ने कहा कि जो काफिला हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का मदीना से चला था, इंसानियत को बचाने के लिए, वही काफिला जब कर्बला में पहुंचा है, तो कर्बला में इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जो कुर्बानी पेश की है, और जो उनके घर वाले बीवी बच्चे सबको असीर करके जब शाम में ले जाया गया तो वहाँ से रिहाई मिली है, तो काफिला कर्बला होते हुए आज ही के दिन जो हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का लूटा हुआ काफिला कर्बला से मदीने में पहुंचा है, उसी की याद में पूरी दुनिया में शिया उनका गम आम करते हैं। मौलाना ने आगे कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि मुझे 72 साथी हुसैन जैसे मिल जाते तो, मैं अपने हिंदुस्तान को हुसैन के रास्ते पर चलकर 24 घंटे में देश को आजादी दिला देता। जुलूस में सुरक्षा की दृष्टि से मुबारकपुर थानाध्यक्ष एसपी सिंह, चौकी प्रभारी रत्नेश दुबे अपने दलबल के साथ भारी संख्या में पुलिस तैनात थी। इस अवसर पर काफी संख्या में मोमिनेन मौजूद थे।