राजेश सिंह

आजमगढ़ । अतरौलिया क्षेत्र के गोर हरपुर गांव में पात्र लाभार्थियों को अभी तक आवास नहीं नशीब हुआ है । जबकि शासन द्वारा यह दावा किया जाता है कि 2022  तक सभी पात्र लाभार्थियों को छत दिया जाएगा, इस दौरान लगभग 50 परसेंट लक्ष्य पूरा कर लिया गया है, और चाभी वितरित कर उन्हें गृह प्रवेश भी कराया जा चुका है, परंतु गांव की सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। गांव में पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे अपना जीवन यापन कर रहे हैं, तो वहीं भारी बरसात में घरों में पानी तैर रहा है, तैरते पानी में किसी तरह छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पीड़ित परिवार रात गुजार रहा है। पीड़ित लोगों का आरोप है कि बार-बार फार्म भरा जाता है लेकिन आवास नहीं मिल रहा। गांव के प्रधान केवल पीड़ित परिवारों को आश्वासन दे रहे हैं कि आप लोगों को जल्द से जल्द आवास नसीब हो जाएगा, लेकिन आवास की आस लगाए पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे चारपाई बिछाकर सोने को मजबूर है। छोटे-छोटे बच्चों को टूटे छप्पर में सुला कर अपने खुद आसमान के नीचे सोने को मजबूर है। गांव निवासी संध्या पत्नी रामजीत गौड़ ने बताया कि मेरे पास घर नहीं है, इसी टूटी झोपड़ी में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर किसी तरह खाना पकाती हूं । घर में पानी भर जाता है, थाली में पानी भरकर बाहर फेंकती हूं, आज तक सुधि लेने के लिए कोई जिम्मेदार दरवाजे तक नहीं पहुंचा, जबकि आवास के लिए कई बार में फार्म भरा जा चुका है। वही रानी पत्नी प्रभुनाथ ने बताया कि चार बार आवास के लिए फार्म भर चुके हैं, जिसकी जांच भी पूरी कर ली गई है, परंतु प्रधान कभी देखने भी नहीं पहुंचे, केवल आश्वासन देने पहुंचे थे। छोटे-छोटे बच्चों के साथ टूटी झोपड़ी में सोने पर रात में डर लगता है, कि कहीं झोपड़ी ऊपर ना गिर जाए। वहीं पीड़ित रेखा पत्नी नौमी ने बताया कि मेरे पास रहने के लिए घर ही नहीं है। पानी में किसी तरह भीगकर रोटी बनाती हूं और बच्चों को खिलाते हैं, 10 बार आवास के लिए फार्म भरा जा चुका, एक बिस्वा खेत भी मेरे पास नहीं है। प्रधान द्वारा बार-बार आश्वासन दिया जाता है ।