(नगरा) बलिया जिले का समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है मगर जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से दूर है,ग्रामीण अस्पतालों के प्रति जिम्मेदार लापरवाह हैं। उदाहरण के तौर पर नगरा सीएचसी को देखें सकते हैं एक करोड से निर्मित सीएचसी रगाई पुताई के अभाव में खुद ही बीमार है। मरीज उपचार के लिए मऊ और वाराणसी के चक्कर लगाने को विवश हैं, इससे उनका शोषण भी हो रहा है। अस्पताल में न तो बिजली है, न ही जेनरेटर की ही सुविधा। इसमें रखा जेनरेटर लंबे समय से खराब पड़ा हुआ है। 30 बेड के अस्पताल में जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके केवल आधा दर्जन बेड हैं। कई टूट गए हैं। अस्पताल के आपरेशन कक्ष में गंदगी है। इसमें रखे जर्जर बेड अपनी उपेक्षा की कहानी बयां कर रहें हैं। अस्पताल में एक्सरे मशीन भी नहीं है। अस्पताल की अभी तक बाउंड्री नहीं बनी है। अराजक तत्व हमेशा यहां अपना अड्डा बनाए रहते हैं। अस्पताल में बिजली का कनेक्शन भी नहीं है। अंदर लगे पंखों ने ज़बाब दे दिया है ।
प्रबोध पाण्डेय दैनिक पूर्वांचल नगरा