बलिया ।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आदिवासी समाज के नेता कार्तिक उरांव जी के जयंती पर नागाजी जीराबस्ती में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त अवसर पर डॉ रमेश राय ने कहा कार्तिक उरांव ने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किये। स्वयं उन्होनें जनजातिय समाज में पैदा होने एवं अत्यंत गरीबी के बावजूद जंगल से लेकर ब्रिटेन तक यात्रा की यात्रा के द्वारा यह दिखाया कि अति निर्धनता, प्रतिभा के उत्थान में अवरोध नही ला सकती। वे भारतीय राजनीति में प्रवेश कर तीन बार सांसद एवं एक बार विधायक रहे। उन्हें एकमात्र हिन्दू आदिवासी कहा जाता है। क्योंकि ईसाई कुटीलता द्वारा हिन्दू समाज को विखण्डीत करने के प्रयासों के विरूद्ध निरन्तर संघर्ष करते ही रहे। जनजातीय समाज को ईसाई धर्मान्तरण लालच के आधार पर किया जा रहा था। उसके विरुद्ध उन्होंने न्यायालय में मुकदमा भी लड़ा। आगे जाकर धाम्रिक स्वतंत्रता के अधिकार द्वारा प्रलोभन के आधार पर धर्म परिवर्तन को निसिद्ध किया गया। जनजातीय समाज की परम्परा एवं वैभवशाली संस्कृति के प्रति अलख जगाने का कार्य किया। उन्होनें कहा जो जनजातीय व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है उसे सरकार द्वारा मिलने वाले सारे लाभों से वंचित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य रूप से मनीष, जिला संयोजक शिवाजी यादव,राकेश गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य रामकुमार यादव व संचालन हरेन्द्र नाथ मिश्र ने किया।