बलिया। रवि सिन्हा।दीपावली को “तिहार”या “स्वन्ति” के रूप में जाना जाता है यह भारत में दीपावली के साथ ही 5 दिन की अवधि तक मनाया जाता है ।प्राचीन कथा के अनुसार दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने 14 वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे तब से आज तक के यह दिन भारतीयों के लिए आस्था और रौशनी का त्योहार बना हुआ है दूसरी कहानियां और प्रसंग है कि भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी राजा नरकासुर का वध किया था इसलिए कृष्ण भक्त दीपावली मनाते हैं भारतवर्ष पर्वो व त्योहारों का देश है। कार्तिक महीना त्योहारों का महीना भी कहा जाता है दीपावली भी उसी श्रृंखला में एक है। जिसे हर उम्र के लोग बड़े चाव से मनाते हैं कहा जाता है कि कलयुग में भौतिक सुख की प्राप्ति मां लक्ष्मी की कृपा से ही होती है और दीपावली के दिन महालक्ष्मी की ही पूजा होती है इसलिए दीपावली का महत्व और भी बढ़ जाता है इंसान अपनी मनोकामना के लिए इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करता है परंतु माना जाता है कि इस दिन प्रभु श्री राम अपना 14 वर्ष का वनवास खत्म कर पधारे थे इस उपलक्ष्य में अयोध्या नगर को दीपों से सजाया गया था वही परंपरा आज भी चली आ रही है। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है दीपावली को असत्य पर सत्य की और अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाता है ।यह पर्व मर्यादा ,सत्य ,कर्म और सद्भावना का प्रतीक है “दीप”और “आवली” की संधि से बने दीपावली में अमावस्या की काली रात भी उजाले से भर जाती है। इस पर्व को दीपोत्सव भी कहा जाता है “तमसो मां ज्योतिर्गमय” का अर्थ है “अधेरे से प्रकाश की ओर जाइए” मुहावरे को चरितार्थ करती है। 5 दिनों के मनाए जाने वाले इस त्यौहार में पहले दिन धनतेरस पर्व इसी दिन भगवान धन्वंतरि का पूजा होता है दूसरे दिन यमराज के निमित नरक चतुर्दशी इसको छोटी दीपावली भी कहते हैं। तीसरे दिन अमावस्या को दीपावली चौथे दिन गोवर्धन पूजा तथा पांचवे दिन भैया दूज के साथ संपन्न होता है हर क्षेत्र में दीपावली मनाने का कारण और तरीका अलग अलग होता है पर संदेश एक ही होता है अंधेरे को हराना उजाले को हर तरफ फैलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व समाज से अंधकार वह भ्रष्टाचार मिटाने का एक सशक्त संदेश देता है समझने की जरूरत है रावण आज हर गली मोहल्ले व नुक्कड़ पर है उसे बस परास्त करने की जरूरत है रामराज्य अपने आप आ जाएगा। जनता जागरूक तो हो अंधेरा अपने आप मिट जाएगा धनतेरस पर बर्तन, झाडू ,सोने -चांदी खरीदना यम द्वितीया पर दीपक निकालना दीपावली पर तरह-तरह के दीए व प्रकाश करना गोवर्धन पर गोबर की मूर्ति बना कूटना भाई दूज पर भाई को चना खिलाना तभी पूर्ण होगा जब देश से अत्याचारियो भ्रष्टाचारियों व व्यभिचारीओं (मानसिक रूप से )का समूल नाश हो जाए और हमारी बहन बेटियां अपने आप को सुरक्षित महसूस करने लगे तब इन त्योहारों का मतलब सही रूप में समाज को गौरवान्वित करेगा

दीपावली पर सूरन का प्रयोग क्यों?……
सूरन को जिमीकंद भी कहते हैं इसकी पैदावार इसी समय होती है अधिकतर लोग नहीं जानते कि सूरन में अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट व वीटा केरोटीन होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है इसमें तमाम पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जैसे कि कैलोरी , फैट, प्रोटीन, पोटेशियम ,घुलनशील फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है इसमें विटामिन बी सिक्स, बी वन ,राइबोफ्लेविन ,फोलिक एसिड ,नियासिन ,विटामिन ए से पोषक तत्व पाए जाते हैं शायद हमारे पूर्वजों को इसकी अच्छी जानकारी थी इसलिए इसको त्यौहार से जोड़ दिया गया कि कम से कम 1 दिन तो सब लोग इसका सेवन करें।