राजेश सिंह
आजमगढ़ । जनपद का एक ऐसा गांव जहां अभी तक सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है, और 45 घरों की आबादी वाला यह गांव पूरी तरह से विकास से अछूता है। क्षेत्र के दरबरा गांव में लोगों को आवास ना मिलने से काफी नाराजगी है । ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा 45 घरों की आबादी वाले इस गांव में सिर्फ गिने चुने लोगों को ही आवास नसीब कराया गया है, बाकी लोग टूटी फूटी झोपड़ी में अपना जीवन यापन कर रहे हैं, तो वही गांव में आने जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। दरबरा हरिजन बस्ती में लगभग 45 लोगों का कच्चा मकान है । जहां लोग बारिश के मौसम में पानी में भीग कर अपना जीवन यापन करते है, परंतु शासन द्वारा यह दावा किया जाता है कि 50% लोगों को आवास देने का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है, वही गांव के दुक्खी ने बताया कि कई बार आवास के लिए प्रार्थना पत्र देने के बाद भी अभी तक आवास नसीब नहीं हुआ, वही ग्राम प्रधान द्वारा बार-बार यह कहा जाता है कि अभी बजट नहीं है । इन आवास विहीन लोगों को जांच करने कोई अधिकारी भी अभी तक गांव में नहीं पहुंचा। दुक्खी द्वारा ग्राम प्रधान से आवास के लिए कहा गया, तो ग्राम प्रधान ने कहा कि जब वोट नहीं दिए तो आवास कैसा? वही गांव की निवासी गीता  ने बताया कि शौचालय और आवास अभी तक नहीं नसीब हुआ ।मेरा कच्चा मकान गिरने की वजह से मेरी सांस काफी घायल हो गई। बारिश के मौसम में बच्चों को खेत में शौचालय के लिए लेकर जाते हैं। गांव के अंदर ना ही कभी ग्राम प्रधान आए और ना ही कभी कोई अधिकारी ।गांव निवासी राजेश ने बताया कि मुझे अभी तक कोई आवास मिला ही नहीं । ग्राम प्रधान द्वारा केवल आश्वासन मिलता रहता है ।7 वर्षों से आजकल करते रहते हैं ।फार्म भरने के बाद भी आज तक गांव में कोई देखने नहीं पहुंचा ।स्थानीय निवासी श्रीमती ने बताया कि हमारे बुजुर्ग मर गए लेकिन अभी तक आवास नहीं मिला ।किसी तरह टूटी झोपड़ी में गुजर बसर करते हैं। ग्राम प्रधान 6 वर्षों से आवास देने का आश्वासन दे रहे हैं लेकिन अभी तक आवास नहीं मिला ।जनपद आजमगढ़ के दरबरा गांव में अभी भी लोग आवास के सपने देखते हैं ।