बलिया भाग-दौड़ के आधुनिक युग मे जहा हर कोई खुद के लिए जीना चाहता है,अपनी हर जरूरतों को पूरा करना चाहता है। वही महापर्व छठ पूजा में किन्नरों ने दुनिया को दुसरो को लिए भी जीने का संदेश दिया। महापर्व छठ पूजा वैसे तो छठ व्रती महिलाएं अपने बच्चों और परिवार के लिए इसका आयोजन करती है। कहते है जिसकी औलाद न हो, जिसकी शादी न हो रही हो जैसे तमाम मनोकामनाओं के पूर्ण होने की या पूर्ण हो जाने के बाद खास तौर पर इस पर्व के आयोजन को खासा महत्व दिया जाता है। लेकिन बलिया का किन्नर समाज इस पर्व को अपने लिए बल्कि उनके लिए इसका आयोजन करते है जिनकी मनोकामनाएं उनके जीवन मे अधूरी हो या पूरी न हो रही हो। किन्नरों के अध्यक्ष माधुरी नायक की माने तो हमारा कोई नही है न आश है न औलाद है। कहा हमारा पति, भाई-बहन, माता-पिता,दोस्त-मित्र सब हमारा जजमान है। ये छठ पर्व हम उनके लिए करते जिन्हें इसकी जरूरत है। माता छठ से प्रार्थना किया कि जिनके औलाद नही है माता उनकी झोली भरे, जिनका विवाह नही हो रहा उनकी जोड़ी बने, हर किसी की मनोकामनाएं पूर्ण हो इसके लिए हम किन्नर समाज इस छठ पर्व को करते है ताकि हमारे जजमान सुख-समृद्धि के साथ ही निरोग रहे।