बृजेश सिंह, अम्बेडकर नगर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा तीनो कृषि कानून की वापसी के बाद किसान संगठन ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि किसानो को मनाने में कोई कमी रह गई। इसलिए इसे वापस लिया जा रहा है। इस मामले में मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। संयुक्त किसान मोर्चा अंबेडकरनगर के संयोजक सत्यदेव पाल ने कहा कि पीएमओ कार्यालय से जारी इस घोषणा का स्वागत करता हूं । साथ ही साथ बधाई देना चाहता हूं कि देर से ही सही, प्रधानमंत्री महोदय को कानून किसान विरोधी होने का एहसास हुआ। उन्होंने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। देरी से  कानून वापस लेने की वजह से इस आंदोलन में लगभग 700 किसानों की शहादतें  हुई हैं। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार के जिद्दी रवैये की है । शहादतों पर प्रधानमंत्री जी ने कुछ स्पष्ट नहीं किया । देर से कानून वापस लिए जाने के कारण लखीमपुर खीरी जैसा निशा हत्याकांड हुआ । आशीष मिश्रा के खिलाफ घटना को अंजाम दिए जाने के तमाम  साक्ष्य के बावजूद अजय मिश्र टेनी जो गृह मंत्रालय में मंत्री पद पर कार्यरत हैं, उनकी बर्खास्तगी एवं गिरफ्तारी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री जी का कोई रुख स्पष्ट नहीं हुआ । तीन कृषि कानूनों के वापसी के साथ-साथ प्रमुख मांगों में एमएसपी पर कानून बनाने, सभी कृषि उत्पादों को एमएसपी के दायरे में लाने तथा स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार सी2+ 50% पर एमएसपी तय किए जाने के संबंध में सरकार का कुछ स्पष्ट रुख नहीं आया है । कृषि कानूनों की वापसी किसानों के धैर्य एवं शांतिपूर्ण आंदोलन का परिणाम है । इस आंदोलन को कृषि कानून वापसी तक ले जाने के लिए अंबेडकरनगर जिले के सभी जन संगठनों का आभार व्यक्त करता हूं। जिन्होंने इस कानून को वापसी तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया है। साथ-साथ उन परिवारों का भी आभार व्यक्त करता हूं जो किसान नेताओं के नजरबंदी के दौरान तमाम कठिनाइयों का सामना किया।