दिनेश गुप्ता

बलिया। लोगों को एकाएक भारतीय क्रिकेट से विरक्ति ! जिसका एक ही जवाब है कि यह खेल सट्टेबाजों व खिलाड़ियों के लिए धन कमाने का जरिया बन गया है । जो खेल कभी जुनून था, दीवानगी थी, अब धन की चकाचौंध में गुम होकर रह गया है । देखते देखते सटोरियों का बोलबाला हो गया है। ऐसे ही जनपद में क्रिकेट के नाम पर बच्चे से लगायत बूढ़े लोग सटोरियों के जाल में फसतें चले गए हैं । सटोरियों द्वारा मोबाइल नेटवर्क के जरिए ₹500 से लेकर लाखों रुपए का सट्टा कैसे लगवा दिया जाता है।
इन सटोरियों का मुख्य काम मोबाइल नेटवर्किंग के जरिए ₹5000 जमा कराए जाते है जिससे खेलने वाले व्यक्ति की आईडी बनाई जाती है आईडी बन जाते ही मोबाइल नेटवर्क से नए व्यक्ति का इन सटोरियों से नेटवर्क कनेक्ट हो जाता है और जितने पैसे का दांव लगाना है उसी मोबाइल से दांव लग जाता है ऐसे होता है सटोरियों का गोरखधंधा ।
दांव लगाने के एवज में इन सटोरियों की मोटी कमाई हो जाती है । उसी में एक क्रिकेट सट्टेबाज ने बताया कि नगर में ऐसे ऐसे लोग हैं जो क्रिकेट मैच फिक्सिंग के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं और लोगों की गाढ़ी कमाई क्रिकेट के सट्टे में दांव लगवा कर लूट लेते हैं।
हालांकि जिस सटोरिए ने इसका खुलासा किया है उसका कहना है कि जो यहां का प्रमुख सटोरिया है उसकी प्रति दिन की कमाई लाखों में है उसने बताया कि पूर्व कोतवाल विपिन सिंह ने क्रिकेट के सट्टेबाजों को कोतवाली बुलाकर हिदायत दिया था । कोतवाल का तबादला होते ही यह क्रिकेट के सट्टेबाज फिर से दोगुनी गति से अपना सट्टेबाजी का कारोबार शुरू कर लोगों को लूटने लगे । इन क्रिकेट के सट्टेबाजों द्वारा शहर के होटलों में कमरा बुक करा कर मोबाइल नेटवर्किंग द्वारा लोगों का पैसा क्रिकेट के खेल में जीतने वाले देश पर दांव लगवा देते हैं । इन सट्टेबाजों से यह मतलब नहीं होता है कि मेरा देश हार रहा है या जीत रहा है ऐसे सट्टेबाज पाकिस्तान की जीत पर लोगों से तालियां बजवाते हैं । इन्हें सिर्फ पैसे से मतलब है । यह देखना है कि वर्तमान कोतवाल बालमुकुंद मिश्रा व तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक राजकरण नैयर इन सट्टेबाजों की नकेल कस कर भोली भाली जनता को लूटने से बचाते हैं या नही ? हो सकता है कि अगले गतांक में सट्टेबाजों के नामों का खुलासा भी हो जाए ।