(बलिया) पूरे भारतवर्ष में भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता की अलग पहचान धोती कुर्ता की बात ही निराली है। समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त इस परिधान का डिजिटल युग में भी जलवा बरकरार है।इसे धारण करने के बाद ही पता चलता है। पूरे भारत देश में पूरब से पश्चिम व उत्तर से दक्षिण तक धोती कुर्ता का प्रचलन है।
हालांकि युवा पीढ़ी इसका प्रयोग शादी विवाह में नहीं करने से यह परम्परा भी विलुप्ति के कगार पर
निःस्वार्थ पत्रकारिता करनेवाले उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के पिन्टू सिंह ने
होली के पवित्र पर्व पर फैशन के दौर में धोती कुर्ता पहनकर अलग संदेश दिया पिन्टू सिंह ने कहा हमारे सस्कृति से विलुप्ति के कगार की ओर बढ रहा है क्षेत्र के जाने माने पत्रकार चौथे स्तंभ पिन्टू सिंह ने भी धोती कुर्ता धारण कर एक अलग मिशाल कायम किए तथा अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को मजबूत करने की युवाओं को प्रेरणा दी।
साथही 2021 वाली लगन मे शादी विवाह में धोती कुर्ता पहन कर निमंत्रण भी किया लोगों ने बधाई दिया।
उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि मनीषियों ने तन ढकने के लिए जिस धोती को अपनाया, वह कई मायने में लाभदायक है। अब तो डिजिटल युग में युवा वर्ग इस परिधान से दूरी बना रहा है, जबकि इसे जीवित रखने की जरूरत है। अन्य गणमान्य लोगों एवं मित्रो ने भी पत्रकार के धोती कुर्ता पहनने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा प्राचीन सभ्यता को जीवित रखने की वीणा उठाने के लिए उनकी सराहना की।