रिपोर्ट, वरूण सिंह
आर्मी हेलकॉप्टर हादसे में देश के पहले CDS बिपिन रावत शहीद हो गए हैं, सेना का हेलीकॉप्टर IAF MI-17 V5 बुधवार दोपहर क्रैश हो गया था, हेलीकॉप्टर में देश के पहले सीडीएस विपिन रावत समेत 14 लोग मौजूद थे, हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस रावत की पत्नी मधुलिका रावत का भी देहांत हो गया है, हादसे में 13 सवारों की मौत हो गई है, भारतीय वायुसेना ने इस क्षति की पुष्टि कर दी है, इसके अलावा इस हेलीकॉप्‍टर हादसे में भारतीय वायुसेना के केवल ग्रुप कैप्‍टन वरुण सिंह ही बच सके, भारतीय वायुसेना ने ट्वीट के जरिए जानकारी दी है कि “बेहद अफसोस के साथ बताना पड़ रहा है कि जनरल बिपिन रावत, श्रीमती मधुलिका रावत और हेलीकॉप्‍टर में सवार 11 अन्‍य लोगों की ‘इस दुर्घटना में मृत्‍यु हो गई है,” एक अन्य ट्वीट में बताया गया कि ग्रुप कैप्‍टन वरुण सिंह का इंजुरी के कारण इस समय वेलिंगटन के मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।
जनरल बिपिन रावत का कुछ ऐसा था जीवन सफ़र
बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च, 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ, रावत के पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी सेना में रहे हैं, और वे लेफ्टिनेंट जनरल पद से रिटायर हुए, रावत की शुरुआती पढाई सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला में हुई, इसके बाद की शिक्षा बिपिन रावत ने इंडियन मिलिट्री अकेडमी, देहरादून से  कैप्टन वरुण सिंह की फोटो
पूरी की, यही नहीं, उन्होंने अमेरिका में वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री ली, बिपिन रावत ने सेना से दिसंबर-1978 में जुड़े, सेना को अपनी सेवाएं देने के दौरान बिपिन रावत अनेक पदों पर रहे। इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में भी उनकी तैनाती रही, रावत मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 रहे, लॉजिस्टिक स्टाफ ऑफिसर, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी, डिप्यूटी मिलिट्री सेक्रेटरी, जूनियर कमांड विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर जैसे कई पदों पर वह सेना में रहे, ऊंची चोटियों की लड़ाई में बिपिन रावत को महाराथ हासिल थी, और दुर्दांत इलाकों में उन्होंने आतंकवाद व उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के लिए कई ऑपरेशन चलाए, बिपिन रावत को काउंटर इंसर्जेंसी का विशेषज्ञ माना जाता था, नॉर्थ ईस्ट में चीन से सटे लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल पर उन्होंने एक इंफैंट्री बटालियन को कमांड किया, वहीं, कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और इंफैंट्री डिवीजन के वे कमांडिंग ऑफिसर रहे, 2008 में कांगो में उन्होंने यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशन में इंडियन ब्रिगेड के चीफ की ज़िम्मेदारी संभाली, अपने अदम्य साहस के लिए रावत को 40 साल से अधिक के सैन्य करियर में कई सेवा मेडल और अवार्ड मिले हैं, यूनाइटेड नेशंस के साथ काम करते हुए भी उनको दो बार फोर्स कमांडर कमेंडेशन का अवार्ड दिया गया।