महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न अत्याचार को रोकने लिए बताये ट्रिप्स

बलिया। मिशन शक्ति के अंतर्गत “कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013” के प्राविधानों पर मेगा जागरूकता कार्यक्रम जिला प्रोबेशन अधिकारी मो0 मुमताज की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में सम्पन्न हुई। उन्होंने यौन उत्पीड़न को परिभाषित किया गया, कामकाजी महिला के प्रति सरकार और नियोक्ता (मालिक) की जिम्मेदारियां भी तय की गई, यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए उचित उपाय बताए गए, यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए हर कार्यस्थल पर समिति बनाने की भी बात कही गई। सभी विभागों के विभागाध्यक्ष को निर्देश दिए कि आईसीसी का गठन किया जाय। इसमें दस व्यक्तियों की कमेटी बनाकर आमजन को जागरूक किया जाय। इस कमेटी के माध्यम से महिलाओं पर हो रहे अत्याचार उत्पीड़न को रोका जा सकता है।

सहायक अभियोजन अधिकारी सुरेश पाठक ने कहा कि महिलाओं का हो रहे उत्पीड़न को रोकने के लिए भारत सरकार ने महिला लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम-2013 लागू किया गया है। कानून एवं नियमों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए वह संगठनों के लिए कमेटी स्थापित करने की जरूरत है। इसमें दो प्रकार की समिति होती है जिसमें आंतरिक शिकायत समिति एवं स्थायी शिकायत समिति, आंतरिक शिकायत समिति के गठन की जिम्मेदारी नियुक्त यानी मालिक की है।* सरकारी क्षेत्र, निजी क्षेत्र, अस्पताल, नर्सिंग होम, खेल की संस्थाएं, स्टेडियम खेल या प्रतियोगिता स्थल, किसी का घर, अगर वहां घरेलू श्रमिक काम करते हो, असंगठित क्षेत्र, अगर कर्मचारी किसी भी जगह पर काम के सिलसिले जाता हो, यातायात के साधन ने काम के लिए सफर करना ये कार्यस्थल के क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। साथ ही उत्पीड़न महिला शिकायत करने के लिए पीड़ित महिला को यौन उत्पीड़न की घटना घटने के तीन महीने के अंदर लिखित शिकायत करनी होती है या विशेष परिस्थितियों में छः महीने तक भी शिकायत की जा सकती है, जरूरत पड़ने पर समिति द्वारा पीड़ित महिला को शिकायत लिखने में मदद करनी होगी, अगर पीड़ित महिला बीमार हो या उसकी मृत्यु हो गई हो तो कोई अन्य व्यक्ति भी शिकायत दर्ज करा सकता है, जिसे घटना की जानकारी हो। बैठक ने समाज कल्याण अधिकारी अभय कुमार सिंह, सीओ सिटी श्री भूषण वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी कृष्ण कुमार पांडेय, जीजीआईसी लता पाण्डेय एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।