रिपोर्ट, अबुल फैज
(मुबारकपुर) आजमगढ़ । 47 वां दो दिवसीय उर्स हाफिज ए मिल्लत विगत रात्रि करीब 1:00 बजे दस्तारबंदी के साथ संपन्न हो गया। इस उर्स का अंतिम जलसा बुधवार की रात्रि नौ बजे शुरू हुआ, जिसमें पूर्व सांसद मौलाना औबैदुल्लाह खान आज़मी ने संबोधित करते हुए कहा कि हाफिज ए मिल्लत मौलाना अब्दुल अज़ीज़ ने 1972 में जिस उद्देश्य के साथ जामिया अशरफिया की स्थापना की थी, उसी उद्देश को बरकरार रखना हम सबका प्रथम कर्तव्य है, और साथ ही उन्हीं के मार्ग पर चलना भी जरूरी है, क्योंकि मात्र उनके मजार पर चादर चढ़ाने से उनका उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता जब तक कि हम उनके मिशन को आगे नहीं बढ़ाएंगे। इसके अतिरिक्त मौलाना मन्नानी मियां बरेली, मौलाना जमील अख्तर, मौलाना अल्लाह बख्श, मौलाना अकील रज़ा, मुफ्ती मोहम्मद अशरफ मुंबई ने भी संबोधित किया। नात प्रस्तुत करने वालों में साजिद रजा गाजीपुरी मौलाना तनवीर रजा कारी महबूब रजा दिल्ली और मोहम्मद निजामुद्दीन आदि शामिल हैं। इस जलसे में जामिया अशरफिया से  शिक्षा संपन्न करने वाले 544 विद्यार्थियों को दस्तारबंदी के साथ ही प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता जामिया के कुलपति अल्लामा अब्दुल हफीज़ अज़ीज़ी और संचालन कैसर आज़मी ने की।
 इस अवसर पर मुफ्ती निजामुद्दीन रिजवी, मौलाना मोहम्मद अहमद मिस्बाही, प्राचार्य मुफ्ती बदरे आलम मिस्बाही, मौलाना नईमुद्दीन अज़ीज़ी, प्रबंधक हाजी सरफराज़ अहमद सहित देश विदेश से सैकड़ों लोग विशेष रूप से उपस्थित थे।