👉पिन्टू सिंह

(बलिया) उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के धरा पर कुछ लोग ऐसे होते है जो जीते जी अपने विचार, स्वभाव एवं कर्मो से सबके दिलो में घर कर जाते है ।
तथा ऐसा अमित छाप छोड़ जाते है कि जो लोगो के लिए एक नजीर बन जाता है तथा इतिहास भी उन्हें स्वर्ण अक्षरों में स्थान देता है। ऐसे ही एक समाजसेवी की मौत पर गांव सहित पूरा इलाका रोया है। ये वृद्ध समाजसेवी कोइ और नहीं बल्कि रसडा तहसील क्षेत्र के मंदा गांव के निवासी लाल बचन गुप्ता उर्फ मुनीब जी थे। मुनीब जी का निधन 81 वर्ष की अवस्था में रविवार की देर रात हो गई।
उनके निधन की खबर फैलते ही सर्द रात में ही सैकड़ों लोगों की भीड़ उनके दरवाजे पर उमड़ पड़ी।
हर लोग मुनीब जी के पार्थिव शरीर का दर्शन करने के लिए लालायित दिखे। उनकी अंत्येष्टि में भी लोगो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और नम आंखो से उन्हें अंतिम विदाई दी।
ये वही मुनीब जी है, जो पूरे जीवन अविवाहित रहकर सभी धर्म संप्रदाय के साथ मिलजुलकर रहते थे।
इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि ये थी कि जब गांव या इलाके में किसी का निधन हो जाता था तो वे ये नहीं देखते थे कि मरने वाला व्यक्ति किस जाति, मजहब का है। तुरन्त उसके दरवाजे पर पहुंच जाते थे बिना किसी संकोच के मृतक के दाह संस्कार या दफनाने की व्यवस्था में जी जान से जुट जाते है।
81 वर्षीय मुनीब जी समाज के लिए जीवन भर अविवाहित रहे और हमेशा सबके साथ मिलजुल रहते थे। ऐसे महामानव के निधन पर धरती अम्बर की भी आंखे नम हो गई। इनके शव यात्रा में जाति धर्म मजहब की सभी कड़ी टूट गई। हर कोई आगे बढ़कर उन्हें कंधा देना चाहता था।
सोमवार की सुबह सैकड़ों लोगों ने गाजेबाजे के साथ अपनी नमःआखो से उन्हें अन्तिम विदाई दी मुखाग्नि व अन्तिम संस्कार बलिया गंगा तट पर के बाद हर कोई नम आंखो से यही कहते सुना गया कि अब गांव के लोगो का अंतिम क्रिया कर्म कैसे सम्पन्न होगा। एक मुनीब जी ही तो थे जो सर्दी की रात हो, गर्मी की दोपहरी हो बरसात हो। हर समय तैयार रहते थे। इस पुनीत काम को करने वाले मुनीब जी की तरह विरले लोग ही धरती पर पैदा होते है। जो जाते जाते अपनी अमिट निशानी छोड़ जाते है।
गांव के प्रबुद्ध जनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की
इस मौके पर पूर्व प्रधान इन्द्रजीत सिह, शैलेन्द्र सिह, रमेश तिवारी, अरुण सिंह, धनजय सिह हरिपाल तिवारी, जिला गौड , आदि लोग गंगा घाट पहुंचे।