वीरेंद्र कुमार पाठक पुराने राजनीतिक परिवार से मजबूत चेहरा हैं 

 बलिया।नगर विधान सभा सीट पर किसकी होगी उम्मीदवारी,क्या सब पर मंत्री पड़ेंगे भारी,या भाजपा कर रही है मंत्री जी को पैदल करने की तैयारी ? ये सारे सवाल आज जनपद की राजनैतिक गलियारों में खूब चर्चा में है । कोरोना की मार कहे या चुनाव आयोग की आचार संहिता की लपलपाती तलवार का डर कहे,न नेताओ की भीड़ दिख रही है और न ही बड़े बड़े होर्डिंग्स व पोस्टर । पहले नेता गण चट्टी चौराहों पर मीटिंग करके अपना जन समर्थन पार्टी हाई कमान को दिखाकर टिकट हासिल कर लेते थे लेकिन इस बार यह भी दांव चुनाव आयोग ने बन्द कर रखा है ।
मोदी युग के आने के बाद भाजपा एक ऐसे दल के रूप में उभरी है जिसमे पार्टी प्रत्याशी नही हर बूथ पर सिर्फ और सिर्फ मोदी ही चुनाव लड़ते है । प्रत्याशी तो बस सिंबल मात्र है । अगर ऐसा नही होता तो पिछले चुनाव में जीते हुए आधे से ज्यादे विधायक तो विधान सभा पहुंच ही नही पाते क्योकि उनको जनता ने मोदी समझ कर जिताया है । अब यह अलग बात है कि ये लोग पिछले पांच सालों में क्षेत्रीय विकास के पैमाने पर जनता की कसौटी पर खरे न उतर रहे हो ।
यही कारण है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पहले ही इशारों इशारों में यह संकेत दे दिया है कि लगभग 40 प्रतिशत वर्तमान विधायको के टिकट कट सकते है । यही इशारा भाजपा खेमे में टिकट के लिये प्रयास कर रहे नेताओ में संजीवनी का काम कर रहा है । बलिया नगर विधानसभा के विधायक व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल का भी लोग टिकट कटा मानकर प्रयास कर रहे है । प्रयासरत नेताओ में भगवान पाठक पूर्व विधायक, नागेंद्र पांडेय,जितेंद्र तिवारी, वशिष्ठ नारायण पांडेय,संजय मिश्रा,नकुल चौबे जैसे पुराने भाजपाई चेहरे है तो वही बसपा छोड़कर भाजपाई हुए वीरेंद्र कुमार पाठक उर्फ टून जी जैसा पुराने राजनैतिक स्व बच्चा पाठक के परिवार का एक मजबूत चेहरा भी है । वही वैश्य विरादरी से डॉ बद्री नारायण गुप्त भी दावेदारों की सूची में शामिल है ।
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह व मुख्यमंत्री योगी जी के अति करीबी वर्तमान मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल का पलड़ा भारी दिख रहा है । बावजूद इसके टिकट के लिये भागदौड़ करने वाले संभावित प्रत्याशियों का मानना है कि मंत्री जी का टिकट कट गया है और भाजपा किसी नये प्रत्याशी पर दांव लगायेगी । सूत्रों की माने तो इतना तय है कि बलिया नगर विधानसभा से भाजपा का जो भी प्रत्याशी होगा, वह ब्राह्मण ही होगा ।
वैसे वीरेंद्र कुमार पाठक के लोग चुनाव आयोग की गाइड लाइन का पालन करते हुए टिकट मिलना सुनिश्चित जानकर प्रचार भी कर रहे है । मंत्री जी के भी लोग जनसंपर्क में लगे हुए है । वही सारे संभावित प्रत्याशी वर्तमान में दिल्ली में डेरा डाले हुए है और हर उस चौखट पर माथा टेक रहे है ,जिससे सहयोग की थोड़ी भी उम्मीद दिख रही है ।
इतना तो तय है कि मंत्री अन्य उम्मीदवारों को तगड़ी टक्कर दे रहे है । अगर ऐसा नही होता तो किसको टिकट मिलेगा,इसकी झलक अबतक दिख गयी होती । यह भी निश्चित है कि इस बार भी जो भी विधायक बनेंगे वो मोदी योगी के नाम पर ही बनेंगे । साथ ही यह भी कहने में संकोच नही है कि आयाराम गयाराम के माहौल ने भी टिकट वितरण को पेचीदा बना दिया है ।
बन्द मुट्ठी लाख की,खुल जाए तो खाक की, वाली अभी कहावत चरितार्थ है ।बलिया नगर विधान सभा से भाजपा प्रत्याशी कौन होगा,का राज खुलने में अभी फरवरी के प्रथम सप्ताह तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी ।