अभिषेक सिंह आलापुर अम्बेडकर नगर की रिपोर्ट

बाबा गोविंद साहब धाम में चल रही श्रीरामकथा के तीसर दिन श्रीराम जन्मोत्सव की कथा सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। भगवान के जन्म पर बधाई भजनों को सुनकर श्रोता झूम उठे। कथावाचक आचार्य मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि भक्तों से प्रेम करने के लिए ही इस धरा पर प्रभु का अवतार होता है। जैसे कोई व्यक्ति घर से बाहर रहकर अपने परिवार के लिए पैसे के बल पर सारी सुख सुविधाएं उपलब्ध करा तो सकता है, लेकिन प्रेम नहीं कर सकता। प्रेम करने के लिए उसे घर आना पड़ेगा। इसी प्रकार से सब कुछ समर्थ होने के बाद भी धरती पर केवल प्रेम के लिए ही प्रभु को अवतार लेना पड़ता है।उन्होंने कहा कि साधु पुरुषों की रक्षा करना, दुष्टों का विनाश और धर्म की स्थापना आदि कार्य बिना अवतार लिए भी प्रभु कर सकते हैं, लेकिन प्रेम नहीं कर सकते। बताया कि जब-जब धर्म का ह्रास होता है और अभिमानी राक्षस प्रवृत्ति के लोग बढ़ने लगते हैं तब-तब कृपानिधान प्रभु विभिन्न प्रकार के दिव्य शरीर धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरते हैं। वे असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं। वेदों की मर्यादा की रक्षा करते हैं। यही श्रीराम के अवतार का सबसे बड़ा कारण है। श्री सीताराम सेवा समित गोविंद धाम ने सभी श्रोताओं का हार्दिक आभार वक्त करते हुए कहा कि आप सभी लोग अधिक से अधिक संख्या में आवे एवं कथा आनंद लें