लालगंज (आजमगढ़ ) विनय शंकर राय की रिपोर्ट

स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र के मई खरगपुर आत्मा अनुसंधान आश्रम परिसर में मंगलवार की सायं महाशिवरात्रि के दिन सायं जया विजया हाल मे परिवार गोष्ठी का आयोजन किया गया । परिवार गोष्ठी को संबोधित करते हुए परम पूज्य बाबा विशाल भारत जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि महाशिवरात्रि का दिन बहुत गोपनीयता का दिन है । प्रकृति ने हमेशा विषपान किया । उसने शिव का विषपान किया । प्रकृति तब तक तांडव करती है जब तक पुरुष सहता है। जब पुरुष खड़ा हो जाता है तो सीमा जान जाती है , मेरा कोई लक्ष्य नहीं है । दुर्बल अपने दायित्व कर्तव्यों को कितना समझते हैं सबल हम नहीं हैं । दुर्बल महसूस करना अपमानित होना है । समय का महत्व होता है , समय के बाद कोई भी चीज मायने नहीं रखती , उसका कोई महत्व नहीं होता है । मैं यश कीर्ति के लिए नही चला था । धन लेने के लिए नहीं देने के लिए चला था । जो यहां आया कुछ न कुछ पाया है । लोक कल्याण के लिए मंदिर बनाया गया है। चक्रव्यूह में घेर दिया गया हूं। पंचभूत शरीर पहले हूं । संसार में धन , दिखावे कृतिम की भावना नही है । कोई भी बच्चा अपने मां बाप की नहीं सुनता है । 56 वर्षों तक मैने देखा भावनाए नही है । भावना होता तो प्रेम होता , प्रेम होता तो विश्वास होता , भावनाएं स्वयं के प्रति है । मुझे जाना तो जल्दी होगा । जिसका सृजन होगा उसे मरना है , जिसका मैंने सृजन किया । उसका विध्वंस करना होगा । जो मेरा अगला कदम है कितना कष्टदायक होगा । 56 वर्ष अपमानित हुआ महाशिवरात्रि के अवसर पर कह रहा हूं कि किसी शर्त पर अपमानित नहीं होऊंगा। मैं रो लूंगा , रोने के लिए तैयार हूं । व्यक्ति को जानना आसान नहीं होता , उसका अतीत जानिए कैसा- कैसा कृत्य करता है। मैं जब आया मेरे पास विश्वास था जीवन में विश्वास न हो तो जीवन का मतलब क्या है । विश्वास हो जाए तो कुछ भी पूर्ण हो जाए । मेरा शिव वही है जिसकी गोद में मैं खेला हूं । मैंने देने चला , संपूर्ण स्वर्ण मंडल दिया , 56 वर्ष कम नहीं होता है मेरा नाम अनंत , असीम नहीं है । प्रेरणा लेते मेरा नाम विशाल भारत है 56 वर्ष पहले विशाल भारत का कोई व्यक्ति धरती पर नहीं है । पति -पत्नी का साथ सफल बनावे कमजोर नहीं , मित्रता कृष्ण – सुदामा की तरह हो समय बहुत कष्टदायक है। अंतिम सांस तक स्वभाव बदल सकते जभी से जागे तभी सवेरा। असंतुलन एक दिन में नहीं होता है जो संरचना का निर्माण करता है उसे भी पता है । इस धरती पर दो तरह के लोग हैं स्व केंद्रित या लक्ष्य केंद्रित , जो स्वकेंद्रित व लक्ष्य केंद्रित हैं वह संपूर्ण सर्व मंडल व धरती के बारे में कुछ सोचेगा । परिवार टूट रहा है। बच्चे माता-पिता का कहना नहीं मान रहे है , क्या कारण है उनका संसार इतना छोटा है । उनके स्व केंद्रित व लक्ष्य केंद्रित में माता-पिता नहीं आते । अपने पर विश्वास करो तुम्हारा विश्वास सुख-दुख , हानि -लाभ , जीवन- मृत्यु से जुड़ा हुआ है । इस अवसर पर पूर्वांचल विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह , बीएन सिंह , रमाकान्त सिंह , तरुण सिंह गुड्डू , शमशेर सिंह , दिवाकर राय ,संतोष कुमार पाठक , सर्वेश , बलवंत सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य रामनयन सिंह ने किया । परिवार गोष्ठी समापन के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया ।