लक्षण नजर आएं तो टीबी की जांच जरूर कराएं


 टीबी मरीजों की पहचान को घर-घर पहुँच रहीं टीम


बलिया, जिले में बुधवार को सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान की शुरुआत हुई | इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉo नीरज कुमार पाण्डेय एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉo आनन्द कुमार ने प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देश पर घर-घर जाकर टीबी रोगियों को खोजने का अभियान शुरू हो गया है। इस कार्य में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 271 टीमें लगायी गयी हैं। जनपद की 20 फीसदी आबादी का लक्ष्य मानकर घर-घर जाकर नये टीबी रोगियों की तलाश की जाएगी। इस दौरान टीबी के लक्षण वालों की जांच कराई जाएगी। रोग की पुष्टि होने पर उनका त्वरित उपचार शुरू किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद को टीबी मुक्त बनाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग हरस्तर पर प्रयासरत है| टीबी के प्रति जागरूकता लाने में सामाजिक संगठन भी जुटे हैं। उन्होंने कहा कि आज भी लोगों में जागरूकता की कमी है।यदि टीबी की पहचान शुरुआती दौर में हो जाए तो मरीज छह महीने इलाज कराने पर इससे मुक्त हो जाता है। टीबी की बीमारी का इलाज अधूरा छोड़ने पर यह गंभीर रूप ले लेता है , फिर यह मल्टीड्रग रेजिस्टेंस टीबी के रूप में सामने आती है ,जो गंभीर होती है। टीबी के मरीज ड्रग रेजिस्टेंट न हों इसके लिए विभाग की ओर से मरीजों का नियमित फॉलोअप किया जाता है। उन्होंने बताया कि टीबी के मरीज को पौष्टिक आहार मिल सके, इसके लिए उन्हें इलाज के दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत प्रतिमाह 500 रुपये सीधे बैंक कहते में दिए जाते हैं |
इस अवसर पर उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एके स्वर्णकार, वेक्टर बॉर्न डिजीज के नोडल अधिकारी ड़ॉ अभिषेख मिश्रा, डॉ मुस्ताक अहमद, प्रशासनिक अधिकारी योगेश पाण्डेय, जिला कार्यक्रम समन्वयक आशीष सिंह, पीपीएम विवेक सिंह, अभिषेक कुमार सिंह तथा ट्रीटमेंट ऑर्गेनाइजर राकेश कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।