रिपोर्ट, वरूण सिंह
भारतीय जनता पार्टी प्रचंड जीत के साथ उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है, वही पूर्वांचल में खराब प्रदर्शन को लेकर भाजपा के रणनीतिकारों के माथे पर जरूर बल ला रहे होंगे, चुनाव से पहले पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने पूर्वांचल धुआंधार प्रचार के साथ ही खुद पीएम नरेन्द्र मोदी ने न सिर्फ कई बड़ी योजनाओं की सौगात दी, बल्कि धुंआधार चुनाव प्रचार भी किया था, इसके बावजूद पूर्वांचल के कई जिलों में पार्टी की स्थिति काफी कमजोर दिखाई पड़ी है, आजमगढ़, गाजीपुर, व अम्बेडकरनगर में तो भाजपा का खाता भी नहीं खुला, ज बलिया, जौनपुर व मऊ में पहले से स्थित खराब दिखी है, 2017 में आजमगढ़ में 1 गाजीपुर में 3 व अम्बेडकरनगर में 2 सीटें भाजपा के पास थीं, इस बार एक भी नहीं मिली हैं, बलिया की 7 में से 5 सीटें उसके पास थीं, इस बार सिर्फ 2 सीटें मिली हैं, इसी तरह मऊ की 4 सीटों में से 3 भाजपा ने जीती थी, लेकिन इस बार सिर्फ 1 सीट मिली है, जौनपुर में उसके पास 4 सीटें थी, इस बार दो मिली हैं, सातवें चरण की 54 सीटों में से भाजपा को 26, तो सपा को 28 सीटें मिली हैं
खतरे के प्रमुख कारण
1 – ओल्ड पेंशन स्कीम लागू किये जाने की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारियों में भाजपा के खिलाफ खासा रोष दिखा है, इसकी गवाही पोस्टल बैलेट दे रहे हैं, अधिकतर सीटों पर पोस्टल बैलेट में सपा भाजपा से आगे रही है ।
समाजवादी पार्टी का बढ़ा वोट प्रतिशत
2 – समाजवादी पार्टी के वोट शेयर में उछाल आया है, लगभग 10 फीसदी का उछाल भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकता है, बसपा का बहुत बड़ा वोट शेयर सपा की ओर शिफ्ट हुआ है, बसपा के वोट शेयर में करीब 10 फीसदी की गिरावट है, भाजपा के वोट शेयर में लगभग डेढ़ फीसदी बढ़ोतरी रही, ऐसे में अनुमान यही है कि बसपा से टूटे वोट भाजपा और सपा दोनों की ओर गये होंगे, भाजपा से थोड़ी नाराजगी के कारण जो वोट टूटे होंगे उसकी भरपाई बसपा से हुई होगी, तभी उसका वोट शेयर स्थिर रहा है, लेकिन सपा के वोट शेयर में बढ़ोतरी ये दिखाती है कि बसपा से टूटे वोट का बड़ा हिस्सा सपा को गया है, साथ ही सपा से कोई टूट नहीं हुई है, ये भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं हो सकता ।