– लोकतंत्र में गरीब की बेटी भी बन सकती राष्ट्रपति
नई दिल्ली। द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है। सोमवार को सीजेआई एनवी रमण ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वे जनजातीय समाज से हैं और उन्हें वार्ड पार्षद से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मिला है। यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है। ये लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी, दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी, भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है।
आज सुबह करीब 10.15 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। चीफ जस्टिस एनवी रमण ने उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोझन में कहा कि “मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी। मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूं, वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था। लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी।
द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में कहा कि “मैं भारत के समस्त नागरिकों की आशा-आकांक्षा और अधिकारों की प्रतीक इस पवित्र संसद से सभी देशवासियों का पूरी विनम्रता से अभिनंदन करती हूं। आपकी आत्मीयता, आपका विश्वास और आपका सहयोग, मेरे लिए इस नए दायित्व को निभाने में मेरी बहुत बड़ी ताकत होंगे। भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर निर्वाचित करने के लिए मैं सभी सांसदों और सभी विधानसभा सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं। आपका मत देश के करोड़ों नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति है।”
शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मंत्रिपरिषद के सदस्य, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजनयिक मिशनों के प्रमुख, संसद सदस्य और सरकार के प्रमुख असैन्य एवं सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।