अतरौलिया, आजमगढ़। श्रावण मास के पवित्र महीने में जहां शिव भक्तों द्वारा प्रमुख मंदिरों पर जलाभिषेक किया जा रहा है वही तीसरे सोमवार को विशेष महत्व के रूप में प्रमुख मंदिरों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। फूल और जल लेकर लोग शिवालय की तरफ अपना रुख किए। आज सावन के तीसरे सोमवार को विशेष महत्व माना जाता है। क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक कैलेश्वर धाम (कैली) स्थान पर सुबह 4 बजे से ही शिव भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई, वही हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा शिवालय गूज उठा।लोगों ने सावन के पवित्र माह के तीसरे सोमवार को मंदिर पहुंचकर स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक किया ।पूरा मंदिर परिसर शिव भक्तों से खचाखच भरा रहा ,वही मंदिर पर पवित्र तीसरे सोमवार को महिलाओं और लड़कियों की संख्या सबसे अधिक रही। कैलेस्वर धाम (कैली) स्थान को द्वापर युग का मंदिर माना जाता है जहां लोगों की आस्था और विश्वास है कि यहां आने पर लोगों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इसी मान्यता के अनुसार विशाल मंदिर परिसर में शिव भक्तों की भीड़ लगी रहती है और स्वयंभू शिवलिंग पर लोग जलाभिषेक चढ़ाते हैं, क्योंकि यह माह भगवान का प्रिय महीना होता है इसलिए सनातन धर्म में सावन में पड़ने वाले सोमवार व्रत का विशेष महत्व होता है। भगवान शिव जी को 3 अंक प्रिय होता है इसलिए भी तीसरे सोमवार को खास माना जाता है इस दिन किए गए पूजा-पाठ और व्रत से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देते है। सावन के पूरे महीने शिवलिंग अभिषेक का विशेष महत्व होता है यह महीना शिवजी की पूजा के लिए समर्पित होता है। शिवलिंग पर जल दूध दही जैसे कई द्रव्य से अभिषेक किया जाता है। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मंदिर परिसर में पुलिस प्रशासन की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रही। इसी क्रम में क्षेत्र के सभी शिव मंदिरों पर सुबह से ही काफी भीड़ रही ,वहां लोगों ने सावन के पवित्र तीसरे सोमवार को भगवान शिव को जलाभिषेक किया। आस्था के जनसैलाब में शिवालयों पर हर हर महादेव का उद्घोष होता रहा। कैलेस्वर धाम कैली के पुजारी महंत दिलीप दास जी ने बताया कि यह मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसके 15वें शिष्य के रूप में दिलीप दास जी महाराज मंदिर पर विराजमान है। यहां शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि यह स्वयंभू हैं जो अपने आप प्रकट हुए हैं इसी मान्यता के अनुसार यहाँ श्रावण मास में सुबह 4 बजे से ही शिव भक्तों की भारी भीड़ लगनी शुरू हो जाती है तथा यहां आने वाले सभी शिव भक्तों की मुरादें पूरी होती है।