सरायमीर, आजमगढ़। स्थानीय शिया कमेटी के तत्वावधान में सैयद कायम रजा के संयोजकत्व में मोहर्रम के चालीसवां का शहीदाने कर्बला के चेहल्लुम का मरकजी व तारीखी जुलूस मंगलवार को अलसुबह 6 बजे चौक स्थित इमामबारगाह तस्कीने जैनब से मजलिस के बाद ताबूत, अलम, ताज़िया व ज़ुलजनाह के साथ निकला जो अपने कदीम रास्तों से होता हुआ खरेवां स्थित सदर इमामबाड़ा पहुंचा। जहां पर कर्बला के 72 शहीदों का ताबूत क्रमवार बरामद हुआ जिसका परिचय कराते हुए सैय्यद ज़ीशान अली निज़ामाबादी ने उन पर होने वाली ज़ुल्म व दर्दनाक शहादत को बयान किया तो हज़ारों की संख्या में मौजूद अज़ादारों की आंखों से आंसू निकल पड़े। पहली मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मासूम असगर ने कहा कि इंसान इमाम हुसैन की जिंदगी और उनकी तालीमात को सामने रखकर हक व बातिल के बीच फ़र्क कर सकता है। हज़रत इमाम हुसैन यजीद जैसे जालिम हाकिम के सामने अपना सर नहीं झुकाया और उन्होंने इंसानियत को ज़ुल्म से बचाने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। मुख्य चौक पर तकरीर करते हुए मौलाना सैय्यद अनवार हसन ने कहा कि इमाम हुसैन की अज़ादारी हमें यह पैगाम देती है कि इंसान नेक अमल अंजाम दे और खुद को गुनाहों से बचाए और समाज में आपसी भाईचारा, प्यार मोहब्बत, मेल जोल और एकता को बाकी रखे। रौजा अली आशिकान मे आशिक़-ए-हुसैन को संम्बोधित करते हुए बनारस से आये मौलाना सैयद कैसर अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार हैं इसलिए जिन्हें जन्नत में जाने की ख्वाहिश है उनके लिए जरूरी है कि इमाम हुसैन की पैरवी करे और बातिल के खिलाफ हमेशा खड़ा रहे चाहे इस के लिए कितनी भी तकलीफ़े बर्दाश्त करना पड़े और कुर्बानी देना पड़े। जुलूस का संचालन सागर आज़मी व मोहम्मद हुसैन सरायमीरी ने किया। अन्त में शिया कमेटी का अध्यक्ष कायम रजा ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया।