अतरौलिया, आजमगढ़। कैलाशी महिला विकास समिति द्वारा संचालित आवासीय मानसिक दिव्यांग विद्यालय, ग्राम ध्यानीपुर, लोहरा, आजमगढ़, में शुक्रवार को अन्तर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के संचालक योगेन्द्र ने बताया कि जो लोग बोल नहीं सकते, सुन नहीं सकते वे एक-दूसरे से विचार व्यक्त करना चाहते हैं तो वे अपने हाथों, सिर और शरीर के हाव भाव द्वारा संकेत करने की कोशिश करते हैं, उसे ही हम सांकेतिक भाषा कहते है। इस भाषा का प्रयोग मूक बधिर दिव्यांगजन द्वारा किया जाता है। हमें ऐसे दिव्यांगजन की अभिव्यक्ति को समझाना चाहिये और उनकी सहायता करनी चाहिए। जिससे उनका भी समाज से लगाव बना रहे। संचालक योगेंद्र ने सभी को भारतीय सांकेतिक भाषा की शपथ दिलाये मैं सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूँ कि मैं परिवार एवं समुदाय के साथ भारतीय सांकेतिक भाषा को सीखूंगा एवं इसे बढ़ावा दूंगा, ताकि बधिर एवं श्रवण समुदाय के लिए वातावरण एवं शिक्षा सुगम्य बन सके। अन्त में उपस्थित सभी लोग एवं मानसिक दिव्यांग बच्चों ने हस्ताक्षर किये और विद्यालय में नाच गाने का भी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रबन्धक सुनीता देवी, गंगा प्रसाद, प्रियंका, विजयमणि, संगीता, सुमित, विनीता, रेनू, निलेश, अंशिका, नीलम, लीलावती और प्रवीन कुमार गिरी आदि लोग उपस्थित रहे।