पवई, आजमगढ़। जिले की अंतिम सीमा पर स्थित बाबा भुवनेश्वर धाम बिलवाई मंदिर परिसर में चल रहे श्री राम कथा के अंतिम दिन कथावाचक संतोष जी महाराज ने सोमवार को हनुमत चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भक्ति का क्षेत्र स्वतंत्र होता है। परंतु भक्ति की प्राप्ति सत्संग के ही द्वारा हो सकती है। सीता भगवान की भक्ति हैं। हनुमान जी महाराज भगवान को तो प्राप्त कर चुके थे। परंतु भगवान की भक्ति को नहीं प्राप्त कर पाए थे। भक्त के जीवन में भगवान की कृपा भक्ति के बिना अधूरी होती है। लंकिनी जैसी राक्षसी के भीतर के आसुरी तत्व को बाहर निकाल कर उसके भीतर की सात्विक वृत्तियों को जागृत कर हनुमान जी महाराज मार्ग में आई हुई विघ्न बाधाओं से लड़ते हुए लंका जैसे देश में लंकिनी को सत्संग की सीढ़ी बनाकर भगवान की भक्ति रूपी सीता को प्राप्त कर लेते हैं। और अजर अमर होने का वरदान प्राप्त कर लेते हैं। उक्त बातें के विलवाई बाजार में बाबा भुवनेश्वर नाथ धाम पर देवदीप मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्री राम कथा के आखिरी दिन अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास पूज्य संतोष जी महाराज ने बताया कथा के अंत में हजारों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रीरामचरितमानस पोथी पर पुष्प समर्पित करते हुए अपने जीवन की बुराइयों का दान किए। जिसमें कार्यक्रम के संयोजक दिलीप मोदनवाल पूर्व प्रधान जी के साथ कई लोगों ने बच्चों के विवाह में दहेज न लेने का संकल्प लिया। कथा के अध्यक्ष दुर्गेश राधे रमण मिश्र जी ने कथा व्यास पूज्य संतोष जी महाराज को भीगी पलकों के साथ अंग वस्त्र प्रदान कर उनको भावभीनी विदाई प्रदान किए। कथा के मंच पर ही समिति ने महाराज जी के साथ आए हुए आचार्य व संगीत की टीम को अंग वस्त्र प्रदान कर विदाई भेंट किए। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता मनोज सिंह टाइगर, आत्मा सिंह, बिजय दुबे, अच्छेलाल यादव, विनय कुमार सिंह, मंजू मिश्रा, पिंटू प्रधान, रंजीत, जितेंद्र तिवारी, पंकज गिरी, अशोक गिरी, फूलचंद्र सिंह, हरिबंश दुबे, कतावरु बिन्द आदि श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया।