बेतिया। भाकपा-माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह सिकटा विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पश्चिम चम्पारण आगमन पर स्वागत किया और पश्चिम चम्पारण की जनता की तरफ से जन समस्याओं से रूबरू होने के लिए बार-बार धन्यवाद और प० चम्पारण की कुछ मुख्य समस्याओं की तरफ ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि मैनाटांड़ प्रखंड के इनरवा बाजार में इंडो नेपाल बोर्डर के पास सड़क बन रही है। जिसमें इनरवा बाजार में कुछ जगहों पर सड़क की चौड़ाई 60-70 फीट है। लेकिन उसी बाजार में ईदगाह के सामने सड़क की चौड़ाई 100 फीट कर दी गई है। जो पदाधिकारियों की साम्प्रदायिक सोच के तहत है। वहाँ जनता के विरोध के बावजूद भारी पुलिस बल लगाकर सड़क निमाण कार्य कराया जा रहा है जबकि सिकटा-मैनारोड़ प्रखंड में सड़क निर्माण की भूमि के बड़े हिस्से का अभी भू-अधिग्रहम भी नहीं हो सका है। इस निमार्ण कार्य से अल्लासंख्यक समाज की भावनाएं आहत हुई है, और उनके अन्दर महागठबचत की सरकार के बावजूद असुरक्षा बढ़ा है। सम्प्रदायिक ताकतों का मनोबल बढ़ा है।
आगे कहा कि बेतिया शहर में जेंगी मस्जिद के पास की दूकानों से अल्पसंख्यक समाज के पचासों परिवारों की पीढ़ी दर पीढ़ी आजीविका चलती रही है। इन दूकानों को सुरक्षित रखते हुए जीएमसीच की चहारदीवारी कराई जाए। इसे साम्प्रदायिक ताकतें मुद्दा बनाते रहती हैं, इसे शीघ्र किया जाय।
नव निर्मित बेतिया नगर निगम के दायरे में बेतिया प्रखंड के 7 पंचायत और नौतन प्रखंड के एक पंचायत के ग्रामीण क्षेत्रों को लाया गया है। जहाँ की 90-95 प्रतिषत आबादी कृषि जीवन और मजदूरी पर निर्भर हैं। जो शहरी क्षेत्रों के विस्तार के दायरे के मानक, कम से कम एक तिहाई आबादी की व्यवसाय पर निर्भरता के विरुद्ध है। बहुत सी सीलिंग से फाजिल, बेनामी जमीन को बचाने और भाजपा से जुड़े भू-माफियाओं और राजनेताओं के हित में किया गया है। उस क्षेत्र में हजारों गरीब परिवारों के आवासीय जमीन के कागजात भी नहीं बन सका है। इससे गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ तो मिलेगा ही नहीं, साल में विस्थापन की बड़ी समस्या खड़ी होगी। पिछड़े क्षेत्र में टैक्स का भार भी गरीबों पर पड़ेगा। इसकी समीक्षा किया जाय और पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम से बाहर किया जाय।
आगे कहा कि वाल्मीकि नगर टाईगर रिजर्व के दायरे में बालू- पत्थर वतन, पर रोक से बाढ़-कटराव की समस्या बढ़ी है और सिचाई के लिए भी पानी आना बंद हो गया है। नदियो सूखते लगी है। इसे नियंत्रित तरीके से निकालने की छूट हो और केन्द्र सरकार की 13 सितम्बर 2017 की अधिसूचना के अनुसार स्थानीय पंचायतों के आदिवासी और अन्य नागरिकों को घरेलू जरूरतों के लिए बालू-पत्थर के इस्तेमाल की दूर हो। पर्चाधारी, सीलींग से फाजिल, बेनामी, गैर मगरूकता जमीन पर गरीबों का अधिकार बहाल किया जाय। यहाँ एक लाख 21 हजार एकड सेलींग से फाजिल जमीन होने की बन्धोपादयाय आयोग ने रिपोर्ट दी है। सीलींग से फाजिल ज़मीन पर गरीबों को परचे दिए जाए। आगे कहा कि गन्ना मूल्य 4 रु. प्रति बिटेल किया जाय। सिकय विधान सभा क्षेत्र में सिकरहना नदी के उराब से उजड़ रहे गांवों सुमरगानी, बिरइ, मोसड़ा, कमवा, सोनवर्षा आदि गानों को बचाने के लिए स्थायी कराव रोधी कार्य किया जाए। सुखलहीं के पास करताही नही, सम्हौली के पास पंडई नहीं, मैनायेड़ में शेरहवा के पास, गोखुला स्टेशन के पास हलतलबी नहीं पर, भड़भड़वा, मौरा के पास करताहाँ नदी पर पुल बनाया जाय। सभी विन्दूओं पर सहानुभूति पुर्वक विचार का आश्वासन उपमुख्यमंत्री द्वारा दिया गया