– शत-प्रतिशत नल-जल योजनाओं की करायी जायेगी फंक्शनालिटी टेस्ट
बेतिया। जिलाधिकारी, कुंदन कुमार ने कहा कि 7-निश्चय योजना के तहत “हर घर नल का जल“ योजना एक अति महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके माध्यम से ग्रामीण/शहरी क्षेत्र में अवस्थित एक-एक परिवार को आच्छादित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विभागीय निदेश के आलोक में पूर्ण हो चुकी योजना का दीर्घ अनुरक्षण नितांत आवश्यक है, ताकि योजना फलीभूत हो सके। इसके लिए आवश्यक है कि पूर्ण हो चुकी एक-एक योजना (वार्डवार) का गहनता से जांच कराना सुनिश्चित किया जाय।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण का मूल पर्याय किसी न किसी कारण से असंचालित योजनाओं को सुचारू कराना है, ताकि सरकार की योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्राप्त हो सके। जिला पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी से नल-जल योजना की समीक्षा में बोल रहे थे।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, अनिल कुमार, अपर समाहर्ता, राजीव कुमार सिंह, अनिल राय, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, मनीष कुमार, वरीय उप समाहर्ता, रवि प्रकाश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, साप्ताहिक तौर पर इस योजना के सभी हितधारकों के साथ बैठक करेंगे तथा नल जल योजना की समीक्षा करेंगे। साथ ही प्रत्येक सप्ताह की बैठक की कार्यवाही उप विकास आयुक्त को उपलब्ध कराएंगे। जिला पदाधिकारी ने कहा कि प्रखंडों में इस योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा डब्ल्यूआईएमसी को दिया गया है। साथ ही पंचायत स्तरीय पंचायत सचिव, कार्यपालक सहायक, तकनीकी सहायक एवं लेखा सहायक की भी समरूप जिम्म्ेवारी है।
उन्होंने कहा कि पूर्ण हो चूकी योजनाओं का साप्ताहिक अनुश्रवण काफी आवश्यक है। इसे सभी सुनिश्चित कराएंगे। प्रत्येक सोमवारीय बैठक में इसकी समीक्षा की जाएगी। जिला पदाधिकारी ने यह भी निदेश दिया कि वार्ड स्तर पर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी 20-25 व्यक्तियों का कम्यूनिकेशन प्लान तैयार कर लें, ताकि सही फिडबैक प्राप्त कर त्वरित कार्रवाई किया जा सके। इसके अतिरिक्त प्रखंड स्तर पर एक कॉल सेंटर की भी स्थापना कराई जाए, जिसमें डेडिकेटेड कर्मी को प्राधिकृत किया जा, जिनके द्वारा एक लॉग बुक का संधारण किया जाएगा।
जिला पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि विगत वर्षो में 10 प्रखंडों 1865 योजनाओं की सघन जांच कराई गई थी, जिसके प्रतिफल में अपूर्ण योजनाएँ पूर्ण कराई गईं तथा त्रुटिरहित योजनाओं में त्रुटि का निराकरण कराया गया। जांच के दौरान पाई गयी गम्भीर अनियमितताओं के आलोक में विभागीय निदेशानुसार विधिसम्मत अनुशासनिक कार्रवाई भी की गयी। जहां फरवरी, 20 से मार्च, 21 के मध्य 3318 योजनाओं को पूर्ण कराया गया। वहीं शत-प्रतिशत योजनाओं को विभागीय संकेतक के अनुसार अभिलेख संधारण कराया गया।
समीक्षा के क्रम में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, सिकटा एवं गौनाहा के द्वारा अपने प्रखंड में क्रियान्वित, अक्रियान्वित एवं कुल योजनाओं का सही आंकड़ा नहीं बतलाया गया। वहीं अक्रियान्वित योजनाओं को क्रियान्वित कराने के संदर्भ में स्पष्ट जानकारी नहीं दिया जा सका। इसके लिए जिला पदाधिकारी के द्वारा इनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करने सहित सुधारात्मक कार्रवाई करने तक वेतन अवरूद्ध करने का निर्देश दिया गया।

जिला पदाधिकारी द्वारा सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी से समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जहां भी प्रखंड विकास पदाधिकारी अथवा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी के स्तर से योजना के अनुश्रवण में चूक होगी, संबंधित पदाधिकारी के विरूद्ध अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित किया जाएगा।
समीक्षा के क्रम में कतिपय प्रखंडों के द्वारा जानकारी दिया गया कि योजना क्रियान्वयन के दौरान अवशेष बची राशि को पूर्व के अध्यक्ष/सचिव वापस नहीं कर रहे हैं। जिला पदाधिकारी द्वारा ऐसे अध्यक्ष/सचिव को चिन्हित करते हुए, प्राथमिकी दर्ज कराने सहित नीलाम पत्र वाद दायर करने का निर्देश दिया गया।