पारम्परिक ददरी मेले में लोगों को वेक्टर जनित रोगों के प्रति किया सचेत

बलिया, पारंपरिक ददरी मेले में संपन्न विराट किसान मेले में स्वास्थ्य विभाग एवं फाइलेरिया नेटवर्क सदस्य द्वारा 17 से 20 नवंबर तक प्रदर्शनी, स्टाल, हस्ताक्षर अभियान चलाकर एवं पंपलेट बांटकर मेले में आए लोगों को फाइलेरिया, कालाजार, डेंगू, चिकनगुनिया के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के तत्वाधान मे सीफार संस्था के सहयोग से फाइलेरिया के मरीजों के लिए गठित बांसडीह ब्लॉक के काशी बाबा समूह की सदस्य दुलारी देवी तथा जय मां वैष्णो देवी समूह की सदस्य मीरा देवी द्वारा स्टाललगाकरफाइलेरिया के प्रति मेले मे आए लोगों को जागरूक किया गया। ब्लॉक पंदह में गठित जय मां भवानी समूह की सदस्य चंदा सिंह और शिव जी समूह के सदस्य संजय कुमार तिवारी,चंपा देवी। बाल केशव नाथ समूह की सदस्य तेतरी ठाकुर और सुनंदा देवी द्वारा भी फाइलेरिया के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
विराट किसान मेले के अंतिम दिन मेले के मंच से जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव द्वारा फाइलेरिया, कालाजार, डेंगू ,चिकनगुनिया के बारे में वहां उपस्थित लोगों को विस्तार पूर्वक बताया गया।उन्होंने कहा की फाइलेरिया वेक्टरजनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। यह न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। शुरूआती दिनों में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो इसका परजीवी नष्ट हो जाता है।
जिला मलेरिया अधिकारी ने मेले में उपस्थित लोगों से कहा कि फाइलेरिया के लिए जनजागरूकता करने में सीफार संस्था सहयोग कर रहीहै। इस संस्था के सहयोग से फाइलेरिया सदस्यों का नेटवर्क बना हैं। मेले में भी काउंटर लगाकर ये नेटवर्क के सदस्य जागरूक कर रहे हैं। यह लोग फाइलेरिया के रोगी की खोज करने में व समय से इलाज करवाने में अपना सहयोग दे रहे हैं। अगर किसी को जानकारी चाहिए तो इनका सहयोग ले सकते हैं। विभाग द्वारा फाइलेरिया के रोगी चिन्हित किए जा रहे हैं। ब्लॉक वाइज 1026 एमएमडीपी किट फाइलेरिया के मरीज़ों में वितरित की जा चुकी है। अभी फाइलेरिया के मरीज चिन्हित किए जा रहे हैं अगर कोई फाइलेरिया का मरीज हो तो आशा को अवश्य सूचितकरें।
काला-जार रोग के बारे में बताया कि किसी व्यक्ति को 15 दिन से अधिक बुखार आना, भूख नहीं लगना, खून की कमी, वजन घटना, त्वचा का रंग काला होना आदि कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। इसका सबसे मुख्य लक्षण त्वचा पर धब्बा बनना है। यदि किसी व्यक्ति में यह लक्षण पाएँ जाएँ हो तो तत्काल अपने नजदीक के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला चिकित्सालय पर निःशुल्क जांच कराकर पूरा इलाज कराएं। यह बीमारी एक बार ठीक होने पर लापरवाही न करें क्योंकि यह बीमारी एक बार ठीक होने पर दोबारा से शुरू हो सकती है। इसलिए चिकित्सक की सलाह बेहद जरूरी है।
डेंगू के लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज़ बुखार, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, दस्त आदि । उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जनपद स्तरीय एवं ब्लाक स्तरीय रैपिड रिस्पांन्स टीम द्वारा निरोधात्मक कार्यवाही के साथ जनजागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, सोर्स रिडक्शन, ज्वर पीड़ित मरीजो के रक्त नमूनों की जाँच,ब्लीचिंग पाउडर, नालियों में लार्वी साइडल का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डेंगू का पता लगाने के लिए एलाइजा जांच बेहद जरूरी है,जिससे डेंगू की पहचान होती है। एलाईजा जांच सदर अस्पताल बलिया के सेंटिनल लैब में निःशुल्क उपलब्ध है। यह जांच कोई भी व्यक्ति नि:शुल्क करा सकता है।