जिले में फाइलेरिया के मरीजों के लिए 23 पेसेंट सपोर्ट ग्रुप नेटवर्क गठित
● जय नारायण तिवारी एवं गजेन्द्र तिवारी जय माँ भवानी पेसेंट सपोर्ट ग्रुप नेटवर्क के हैं सदस्य
बलिया, 18 जनवरी 2023
ब्लॉक पंदह के पकड़ी गांव निवासी 42 वर्षीय जय नारायण तिवारी बताते हैं कि दाएं एवं बाए पैर में उन्हें फाइलेरिया (हाथी पांव) का संक्रमण है। यह रोग उनको 20 साल से है। इसकी शुरुआत ठंड और बुखार से हुई थी। पहले उन्होंने अपना इलाज सरकारीअस्पताल में कराया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। उसके बाद लोगों के कहने पर कई चिकित्सालय में इलाज कराया। कोई राहत महसूस नहीं हुआ। इसी बीच जय मां भवानी पेसेंट सपोर्ट नेटवर्क पकड़ी से में जुड़ा। इसके बाद नजदीकी न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूर से एमएमडीपी किट व दवा मिली। साथ ही वहां व्यायाम के बारे में भी बताया गया। दवा खाने के बाद उनको आराम मिला और सूजन भी कुछ कम हुई। वह बताते है कि
व्यायाम मैं दो बार रोज करता हूं। इसको करने से बहुत ही लाभ हुआ एवं दवा का सेवन भी किया। अब मैं नए मरीज को ढूंढने एवं सपोर्ट ग्रुप में जोड़ने में अपना योगदान दे रहा हूं। समूह की बैठक में मैं नियमित रूप से भाग लेता हूं तथा सारे सदस्यों के अनुभव को सुनकर अपना भी दर्द बांटता हूं। जब से मैं सपोर्ट ग्रुप नेटवर्क से जुड़ा हूं फाइलेरिया की दवा के नाम पर मेरा एक रुपये भी खर्च नहीं हुआ है। पहले इसी इलाज में मैं बीस हज़ार रुपए से अधिक खर्च कर चुका हूं।
ब्लॉक पंदह के अंतर्गत पकड़ी गाँव निवासी 45 वर्षीय गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि दाएं पैर में फाइलेरिया (हाथी पाँव) का संक्रमण है। इससे मै 10 साल से फाइलेरिया (हाथी पाँव) से पीड़ित हूँ। इसकी शुरुआत बुखार से हुई। निजी अस्पताल में डॉक्टर से पांच से छह साल तक इलाज कराया तब पर भी सूजन कम नहीं हुई। सूजन बढ़ती ही गयी, खुजली होती रहती है, उसके बाद दर्द भी होता है। 2 वर्ष पहले हाइड्रोसील का ऑपरेशन भी कराया था। जब से मै जय माँ भवानी पेसेंट सपोर्ट नेटवर्क पकड़ी से जुड़ा।उसके बाद एक्सरसाइज करने की मुझे जानकारी मिली, जो मैं प्रतिदिन सुबह और शाम को करता हूं ,और इससे बहुत ही लाभ हुआ है। इस सपोर्ट ग्रुप का सदस्य बनने से मैं काफी खुश हूं, और सपोर्ट ग्रुप के बारे में मैं लोगों को बताता भी हूँ, जिससे नए मरीजों का भी भला हो सके। जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि जनपद के लिम्फोडिमा (हाथी पांव) के चिन्हित 1422 मरीज हैं। एवं हाइड्रोसील के 277 मरीज हैं | फाइलेरिया के मरीजों में 1210 एमएमडीपी किट का वितरण किया गया है।
*क्या है फाइलेरिया:-*
फाइलेरिया वेक्टरजनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। यह न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। शुरूआती दिनों में डाक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो इसका परजीवी नष्ट हो जाता है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एमडीए अभियान 10 फरवरी से 27 फरवरी 2023 तक चलाया जायेगा। इसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर फाइलेरिया की दवा खिलायेगी।इस अभियान के तहत दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती व गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को छोड़कर सभी को फाइलेरिया की दवा अपने सामने खिलाएंगे। उन्होंने बताया कि लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा खा लेने से इस बीमारी के होने से रोकने या नियंत्रित करने में मदद मिलती है।यह दवा पूरी तरह से सुरक्षित है।
इसके बचाव हेतु घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखने, पानी जमा न होने देनेऔर समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करने के प्रति भी जागरूक किया जाता है ।