बलिया। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रशिक्षण उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित एक सप्ताह के संकाय संवर्धन कार्यक्रम का उद्घाटन विवि सभागार में मंगलवार 8 जुलाई को हुआ। ‘भारतीय शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता’ विषयक इस कार्यक्रम को समाजशास्त्र एवं अर्थशास्त्र विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. श्री प्रकाश पाण्डेय, दर्शनशास्त्र विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा जानने के साथ देखने, अनुभव के साथ अनुभूति के सहभाव एवं संशय से मुक्ति की रही है। कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा वाद, प्रतिवाद और संवाद की रही है, इसमें तत्त्व चिंतन पर बल दिया गया है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि कई सदियों तक भारतीय ज्ञान परम्परा को मिटाने का प्रयास किया गया अब ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के तहत इन्हें पुनः व्यवहार में लाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि इस आयोजन के द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा से उन सूत्रों को निकाला जाये जिससे 21 वीं सदी में शिक्षकों के शिक्षण कौशल का विकास हो सके। सप्ताह पर्यंत चलने वाले इस कार्यक्रम की रूपरेखा डाॅ. गुंजन कुमार ने प्रस्तुत की।

द्वितीय सत्र में प्रो. देव नारायण पाठक, नेहरु ग्राम भारती विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने ‘शिक्षा में व्याकरण के महत्त्व’ पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ.स्मिता, अतिथि स्वागत डॉ. प्रियंका सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रज्ञा बौद्ध ने किया। इस अवसर पर डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ. विनीत सिंह, डाॅ. अभिषेक त्रिपाठी, डाॅ. प्रमोद शंकर पाण्डेय, डाॅ. तृप्ति तिवारी आदि विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक तथा छात्र उपस्थित रहे l