बिहार की सियासत में सस्पेंस और रोमांच का दौर जारी है, राज्य के मुख्यमंत्री व जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार एक बार फिर लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में वापसी करेंगे, अगर वाकई में ऐसा होता है तो यह आगामी लोकसभा चुनावों से पहले जदयू और भाजपा दोनों के लिए फायदे का सौदा होगा,

जाने भाजपा के लिए क्यों अहम हैं नीतीश कुमार

2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए ने बिहार की 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की थी, तब इसमें बीजेपी, जदयू और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) शामिल थीं. यदि नीतीश कुमार वापस एनडीए में आते हैं, तो बीजेपी की बिहार में वही प्रदर्शन दोहराने की उम्‍मीद बढ़ जाएगी, भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 400 का आंकड़ा पार करने का टारगेट सेट किया है, बिहार में पिछला प्रदर्शन दोहराए बगैर यह लक्ष्‍य हासिल कर पाना मुश्किल होगा, नीतीश कुमार एनडीए में वापसी का फैसला लेते हैं तो उन्हें भी आगामी लोकसभा चुनावों में इस कदम से फायदा होने की उम्मीद है, 2019 में जदयू ने 16 लोकसभा सीटें जीती थीं, वह इस साल अपनी सीटों में सुधार करना चाहेगी, जाति सर्वेक्षण के हथियार से लैस नीतीश राज्य में अपनी पहुंच का विस्तार करने के लिए भव्य राम मंदिर उद्घाटन के बाद बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे का फायदा उठाना चाहेंगे, इसके अलावा लालू और उनके बेटे तेजस्वी बिहार में काफी जनाधार वाले नेता हैं, जबकि भाजपा के पास अभी भी राज्य में व्यापक अपील वाला कोई नेता नहीं है, भगवा पार्टी कई अन्य राज्यों की तरह बिहार में चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे और लोकप्रियता पर निर्भर है, नीतीश कुमार फिर से एनडीए गठबंधन में वापस आते हैं, तो बीजेपी को यह भी देखना होगा कि उनकी पूरी पार्टी, खासतौर से उनके पूरे विधायक जेडीयू के साथ बने रहते हैं या नहीं ।

बिहार विधानसभा में किस दल के कितने हैं विधायक

राजद के 79 विधायक, भाजपा के 78 विधायक, जदयू के 45 विधायक, कांग्रेस के 19 विधायक, भाकपा (मा-ले) के 12 विधायक, भाकपा (माले) के 2 विधायक, भाकपा के 2 विधायक, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 4 विधायक, एआईएमआईएम के 1 विधायक और 1 निर्दलीय विधायक. बिहार विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 243 है. यहां सरकार बनाने के लिए 122 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है ।