आजमगढ़ । श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी बचपन से ही समाज की सेवा करते चले आ रहे हैं, लेकिन अब श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी राजनीति के माध्यम से समाज की सेवा करने का मन बना चुके हैं । इसके लिए उमाशंकर महाराज जी बाकायदा आजमगढ़ सदर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का भी मन बना चुके है । श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी का मानना है कि जब हम राजनीति के माध्यम से लोगों की सेवा करेंगे, तो ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा । बता दें कि श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी सिद्ध पीठ श्री दुर्गा जी मंदिर (दुर्गा जी ट्रस्ट) के महंत हैं । और यह सिद्ध पीठ तरवा थाना क्षेत्र के बेदिया गांव में स्थित है । श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी 6, 4, 2016 से अन्न को त्याग दिए हैं । 24 घंटेके अंदर 200 ग्राम से ज्यादा पानी भी नहीं पीते है । इसके अलावा अगर कहीं बाहर जाते हैं, तो अधिकतम तीन केले 24 घंटे में खाते है, और रात में भुने हुए आलू का सेवन करते हैं । श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी के अनुवाई काफी हैं । इसका जीता जागता उदाहरण तब देखने को मिला, जब 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हजारों की संख्या में अपने अनुयायियों को लेकर के पहुंचे थे, और पूरे जनपद में उनकी लोकप्रियता देखने को मिली थी ‌। अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद लौटे और पूरे जनपद में लगभग सभी के यहां प्रसाद का वितरण भी कराया‌ । श्री 108 उमाशंकर महाराज जी का कहना है कि वैसे तो मैं भाजपा से चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन अगर टिकट नहीं मिला तो भी मैं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडूंगा । उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समाज के लिए अच्छा कार्य कर रहे हैं, और जिस तरह से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री लोगों को 100% गारंटी कार्य करने की देते हैं, उसी तरह से मैं भी समाज को 100% गारंटी कार्य करने का दूंगा । और सभी की सेवा करने का कार्य करूंगा ।

श्री श्री 108 उमाशंकर जी महाराज चाय के हैं शौकीन
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आजमगढ़ । श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी सिद्ध पीठ श्री दुर्गा जी मंदिर (दुर्गा जी ट्रस्ट) के महंत हैं, और बचपन से लोगों की सेवा करते चले आ रहे हैं । अब वह राजनीति के माध्यम से लोगों की सेवा करने का मन बना चुके हैं । श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी को खाने की चिंता नहीं है, ना ही पानी पीने की चिंता है, श्री श्री 108 उमाशंकर महाराज जी चाय के शौकीन है । उनको जब-जब चाय मिल जाए तब-तब वह चाय का सेवन करते हैं । बाकी उनको किसी चीज के खानें में रुचि न के बराबर है ।